दक्षिण कोरिया को झटका, उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने की ट्रंप की कोशिश से बढ़ी टेंशन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों का आकार कम करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने अपने फैसले के पीछे दक्षिण कोरिया के अमेरिका के ईरान संबंधी अभियान में शामिल न होने और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का हवाला दिया। इस फैसले से अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन और एशिया में अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश क्यों दिया?
ट्रंप ने वार्षिक उलची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास का आकार घटाने का निर्देश दिया। यह अभ्यास अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं की युद्ध तैयारी और उत्तर कोरिया से संभावित खतरे से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए आयोजित किया जाता है। 2026 का अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक प्रस्तावित है।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें इन सैन्य अभ्यासों से आपत्ति है और उन्होंने किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दक्षिण कोरिया के ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में शामिल न होने को भी अपने फैसले से जोड़ा।
दक्षिण कोरिया की सुरक्षा को लेकर चिंता
दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सैन्य सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश को परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया से लगातार सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ता है। संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और युद्ध तैयारी बनाए रखने का अहम माध्यम हैं।
ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका के सहयोगियों और सुरक्षा विशेषज्ञों में यह चिंता बढ़ी है कि सैन्य अभ्यासों में कटौती से अमेरिकी गठबंधन की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसका फायदा चीन और उत्तर कोरिया को मिल सकता है।
किम जोंग उन से बातचीत की कोशिश?
ट्रंप लंबे समय से किम जोंग उन के साथ व्यक्तिगत संबंधों को अहमियत देते रहे हैं। उनके पहले कार्यकाल में दोनों नेताओं के बीच तीन मुलाकातें हुई थीं। अब सैन्य अभ्यासों में कटौती को उत्तर कोरिया के साथ दोबारा बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, उत्तर कोरिया ने अभी तक अमेरिकी पहल पर कोई स्पष्ट सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां 2018 की तुलना में काफी बदल चुकी हैं और उत्तर कोरिया की परमाणु एवं मिसाइल क्षमता पहले से अधिक मजबूत है।
अमेरिका के अन्य सहयोगियों में भी चिंता
ट्रंप के फैसले का असर केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी सहयोगियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि संकट की स्थिति में वाशिंगटन उनकी सुरक्षा के लिए कितनी मजबूती से खड़ा रहेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अमेरिका अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ सैन्य अभ्यास और सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को कम करता है, तो जापान और अन्य एशियाई सहयोगी भी अपनी रक्षा रणनीति पर नए सिरे से विचार कर सकते हैं।
दक्षिण कोरिया के सामने नई चुनौती
ट्रंप के फैसले के बाद दक्षिण कोरिया में अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की चर्चा तेज हो सकती है। अमेरिकी सैन्य समर्थन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने की मांग पहले से मौजूद है।
हालांकि, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग जारी रखने और उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखने की नीति पर जोर दिया है।
निष्कर्ष
ट्रंप का सैन्य अभ्यास कम करने का फैसला एक तरफ किम जोंग उन के साथ संभावित कूटनीतिक संवाद की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इससे अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ट्रंप की रणनीति उत्तर कोरिया को बातचीत की मेज पर लाती है या इससे अमेरिका के सहयोगियों का भरोसा कमजोर होता है।





