रूस-जर्मनी में बढ़ा तनाव, मॉस्को ने बर्लिन की सलाह पर जताई नाराजगी

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान रूस और जर्मनी के बीच तनाव एक बार फिर सामने आया। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो की ओर बढ़ते तनाव को कम करने और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सलाह पर तीखी प्रतिक्रिया दी और जर्मनी की मौजूदा विदेश एवं सुरक्षा नीति पर सवाल उठाए।

जर्मनी ने रूस से क्या अपील की?

जर्मनी की ओर से रूस से यूरोप और नाटो के साथ बढ़ते तनाव को कम करने का आग्रह किया गया। जर्मन पक्ष ने रूस के साथ बेहतर संबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन इसके लिए यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की वास्तविक इच्छा को जरूरी बताया।

लावरोव ने क्या कहा?

जर्मनी की अपील के जवाब में लावरोव ने बर्लिन की मौजूदा नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने जर्मनी पर यूक्रेन का प्रमुख समर्थक बनने और यूरोप में अपनी सैन्य भूमिका बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान लावरोव ने द्वितीय विश्व युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जर्मनी ने उस युद्ध से मिले सबक को भुला दिया है।

दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात भी हुई

रूस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई। यह बैठक 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली आमने-सामने की बैठक बताई गई। हालांकि, बैठक के बाद लावरोव ने इसे लेकर कहा कि जर्मन विदेश मंत्री ने रूस की आलोचना वाली अपनी सार्वजनिक स्थिति को ही दोहराया।

हाल में क्यों बढ़ा तनाव?

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और जर्मनी के संबंधों में तनाव बना हुआ है। हाल के समय में यह तनाव और बढ़ा है। जर्मनी ने लीपजिग हवाईअड्डे पर कथित ड्रोन हमले के प्रयास के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था। रूस ने इन आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कथित ड्रोन हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली थी।

दोनों देशों के बीच काला सागर में रूसी हमलों और व्यावसायिक जहाजों से जुड़े आरोपों को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं।

पश्चिमी देशों पर भी लावरोव ने साधा निशाना

लावरोव ने पश्चिमी देशों पर रूस को रणनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने अमेरिका की यूरोपीय सुरक्षा नीति और यूक्रेन को लेकर उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए।

वहीं, जर्मनी का कहना है कि रूस को यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर बना हुआ है।

UNSC की स्थायी सीट को लेकर भी रूस का रुख

लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जर्मनी और जापान को स्थायी सदस्यता दिए जाने के विचार का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि रूस ऐसी किसी कोशिश को वीटो करेगा। इसके जवाब में जापान ने अपने शांतिपूर्ण रुख और लोकतंत्र, स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

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