साधुओं की हत्या के बाद शवों को जलाने की कोशिश, आरोपी ने कबूला वारदात के बाद घर जाकर सोने का सच

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में मंदिर परिसर में दो साधुओं की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, खुदागंज क्षेत्र के सुथा गांव में मंदिर परिसर में रहने वाले बाबा गोपालदास और बाबा बिहारीदास की कथित तौर पर लोहे के पाइप से हमला कर हत्या कर दी गई। इसके बाद आरोपी ने दोनों शवों को घी और कपूर की मदद से आग लगा दी। पुलिस ने मामले में सुमित नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपी मंदिर की जगह पर कब्जा करना चाहता था और वहां अपना प्रभाव कायम करने की योजना बना रहा था। बताया जा रहा है कि वह पहले भी मंदिर में आता-जाता था और दोनों साधुओं के साथ बैठता था।

पहले दोनों साधुओं के पास सोने का नाटक किया

पुलिस के मुताबिक, घटना बुधवार रात करीब 10 से 12 बजे के बीच की है। आरोपी घर से लोहे का पाइप लेकर मंदिर पहुंचा। वहां उसने करीब 30 से 40 मिनट तक दोनों साधुओं के पास सोने का नाटक किया। जब दोनों गहरी नींद में चले गए तो आरोपी ने पहले बाबा गोपालदास और फिर दिव्यांग बाबा बिहारीदास के सिर पर लोहे के पाइप से वार किया।

पुलिस के अनुसार, हमले के बाद दोनों की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने मंदिर में मौजूद पूजा सामग्री में रखे घी और कपूर आदि की मदद से दोनों शवों में आग लगा दी। आरोपी कथित तौर पर शवों के जलने तक मौके पर मौजूद रहा और इसके बाद वहां से घर लौटकर सो गया।

पहले पेट्रोल से आग लगाने का था शक

घटना के बाद शुरुआती तौर पर पुलिस को आशंका थी कि साधु की बाइक से पेट्रोल निकालकर शवों में आग लगाई गई होगी। हालांकि जांच के दौरान बाइक में पेट्रोल मौजूद मिला। इसके बाद मौके पर मौजूद सामान की पड़ताल की गई और घी-कपूर आदि से आग लगाए जाने की बात सामने आई।

पुलिस ने आरोपी के घर के पास स्थित घूरे से लोहे का पाइप भी बरामद किया है। इसी पाइप से दोनों साधुओं पर हमला किए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।

सुबह ग्रामीणों को हुई घटना की जानकारी

गुरुवार सुबह ग्रामीण मंदिर के पास से गुजर रहे थे। आमतौर पर वहां मौजूद साधुओं से बातचीत होती थी, लेकिन सुबह आवाज देने पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीण अंदर की ओर गए तो वहां धुआं उठता दिखाई दिया। साधुओं को वहां न देखकर ग्रामीणों ने आसपास के लोगों को सूचना दी।

इसी दौरान गांव का एक व्यक्ति सफाई के लिए मंदिर पहुंचा। वहां का दृश्य देखकर वह भी स्तब्ध रह गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। दोनों साधुओं के शव बुरी तरह जले हुए मिले।

करीब 40 साल से मंदिर में रह रहे थे गोपालदास

ग्रामीणों के अनुसार, बाबा गोपालदास करीब 40 वर्ष पहले सुथा गांव आए थे। वह कथावाचक भी थे और आसपास के गांवों में धार्मिक कथाएं सुनाने जाते थे। ग्रामीणों के मुताबिक, वह मूल रूप से अजीजगंज क्षेत्र के रहने वाले थे।

बाबा बिहारीदास गांव के ही रहने वाले थे और गोपालदास के शिष्य बताए जा रहे हैं। करीब दस वर्ष पहले उन्होंने संन्यास लिया था। उन्हें पैरालिसिस की समस्या थी और वह डंडे के सहारे चलते थे। घटना से पहले बुधवार शाम करीब साढ़े छह बजे वह खाना लेकर गोपालदास के पास सोने गए थे।

बिहारीदास को मंदिर से जाने के लिए धमकाने का आरोप

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि आरोपी सुमित अक्सर मंदिर आता था। आरोप है कि वह बाबा बिहारीदास से मंदिर छोड़कर चले जाने के लिए कहता था। घटना वाली शाम भी उसके मंदिर पहुंचने और वहां मौजूद लोगों को धमकाने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से सात मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन मामले आर्म्स एक्ट से संबंधित बताए गए हैं। दिसंबर 2025 में वह आर्म्स एक्ट के एक मामले में जेल गया था और अगस्त में जमानत पर बाहर आया था।

मंदिर पर कब्जे की योजना की जांच

पुलिस की शुरुआती जांच में मंदिर की जगह पर कब्जा करने की कथित योजना को हत्या की वजह के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पुलिस आरोपी के पुराने मामलों तथा मंदिर से उसके संबंधों की भी जांच कर रही है।

ग्रामीणों ने पहले भी लगाए थे गंभीर आरोप

ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी पहले भी तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल रहा है। उसके खिलाफ लोगों को धमकाने और मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन पुराने आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित मामलों के रिकॉर्ड से होना बाकी है।

फिलहाल पुलिस दोहरे हत्याकांड की जांच कर रही है। घटना के बाद गांव और मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

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