लाइफस्टाइल से लेकर तनाव तक, जानिए हाई ब्लड प्रेशर के बड़े कारण

हाई ब्लड प्रेशर आज की सबसे आम हेल्थ समस्याओं में शामिल है। अक्सर लोग BP बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना शुरू कर देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर की रीडिंग तो कंट्रोल में आ जाती है, लेकिन क्या सिर्फ नंबर सामान्य होना ही काफी है?
अमेरिकन कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जैक वुल्फसन के मुताबिक, BP की दवाएं केवल रीडिंग कम करती हैं, जबकि बीमारी की असली वजह को ठीक नहीं करतीं। हाई ब्लड प्रेशर शरीर का एक संकेत है, जो बताता है कि अंदर कहीं न कहीं गड़बड़ी चल रही है। इसके पीछे लगातार तनाव, नींद की कमी, पेट की चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब लाइफस्टाइल जैसी वजहें हो सकती हैं।
ब्लड प्रेशर वह दबाव है, जो हार्ट के पंप करने पर ब्लड नसों की दीवारों पर डालता है। इसे दो हिस्सों में मापा जाता है- सिस्टोलिक और डायस्टोलिक प्रेशर। लंबे समय तक हाई BP रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते और शरीर अंदर ही अंदर प्रभावित होता रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड, तनाव, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, मोटापा, नींद की कमी, स्मोकिंग और शराब जैसी आदतें ब्लड प्रेशर बढ़ाने की बड़ी वजह हैं। हालांकि शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल सुधारकर BP को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक हाई रहने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेना जरूरी हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि हाई BP के मरीजों को दवाओं के साथ डाइट, नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और पर्याप्त नींद पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही मरीजों को डॉक्टर से यह जरूर पूछना चाहिए कि उनके BP की असली वजह क्या है, क्या दवा लंबे समय तक लेनी होगी और लाइफस्टाइल में कौन-से बदलाव जरूरी हैं।





