सुनने की क्षमता में कमी के पीछे क्या हैं कारण? जानिए क्या बहरापन हो सकता है ठीक

उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता में कमी आना आम बात मानी जाती है, लेकिन अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। बच्चों और युवाओं में भी कम सुनाई देने और बहरेपन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक तेज आवाज में संगीत सुनना, कान में संक्रमण, अधिक वैक्स जमा होना, सिर या कान में चोट और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या स्थायी बहरेपन में बदल सकती है।

बहरेपन के प्रमुख कारण

हर साल 3 मार्च को मनाए जाने वाले ‘वर्ल्ड हियरिंग डे’ का उद्देश्य सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों के अनुसार बहरेपन के कई कारण हो सकते हैं—

  • उम्र बढ़ने के साथ कान के अंदरूनी हिस्से की कोशिकाओं का क्षतिग्रस्त होना
  • लंबे समय तक 85 डेसिबल से अधिक तेज आवाज के संपर्क में रहना
  • कान के संक्रमण या खसरा जैसी बीमारियां
  • जन्मजात या जेनेटिक कारण

मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनियाभर में करोड़ों लोग सुनने की क्षमता में कमी से जूझ रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या स्थायी रूप ले सकती है। कम सुनाई देने का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और लंबे समय तक समस्या रहने पर अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।

क्या बहरापन ठीक हो सकता है?

  • यह इस बात पर निर्भर करता है कि सुनने की क्षमता में कमी किस कारण से हुई है। यदि समस्या कान में वैक्स जमा होने या संक्रमण के कारण है तो दवाओं और उपचार से सुनने की क्षमता वापस आ सकती है। हालांकि, यदि कान की अंदरूनी संवेदनशील कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं तो इसे पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता। ऐसे मामलों में हियरिंग एड या अन्य सहायक उपकरण मददगार साबित होते हैं।

जीन थेरेपी से उम्मीद

हाल के वर्षों में जीन थेरेपी को लेकर भी उम्मीद जगी है। वर्ष 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि कुछ मामलों में जन्मजात बहरेपन से जूझ रहे मरीजों की सुनने की क्षमता में इंजेक्शन आधारित जीन थेरेपी से सुधार देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में अभी और व्यापक शोध और परीक्षण की आवश्यकता है।

कैसे करें बचाव?

  • तेज आवाज से बचें और ईयरफोन का सीमित उपयोग करें
  • कान में संक्रमण या तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, खासकर मधुमेह और रक्तचाप के मरीज
  • बच्चों की सुनने की जांच समय-समय पर कराएं

विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार से कई मामलों में बहरेपन के खतरे को कम किया जा सकता है।

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