देश की 70% आबादी में विटामिन D की कमी, सेहत के लिए बन रही गंभीर खतरा

अच्छी सेहत के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का नियमित सेवन बेहद जरूरी है। लेकिन खराब जीवनशैली और गलत खान-पान की आदतों के कारण भारतीय आबादी में विटामिन और मिनरल्स की कमी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, देश की 57% से अधिक महिलाएं आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से पीड़ित हैं, वहीं विटामिन-D की कमी भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।
भारत जैसे देश में, जहां साल भर पर्याप्त धूप मिलती है, इसके बावजूद 70–80% आबादी में विटामिन-D की कमी पाई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, धूप विटामिन-D का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है, लेकिन कम धूप में रहना, इनडोर लाइफस्टाइल और असंतुलित आहार इसकी कमी के प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञ की राय
Fortis Hospital Delhi के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्सय बताते हैं कि हर पांच में से चार भारतीय विटामिन-D की कमी से जूझ रहे हैं। यह एक हार्मोन-जैसा पोषक तत्व है, जो शरीर के कई सिस्टम को साथ-साथ काम करने में मदद करता है। इसकी कमी से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
क्यों जरूरी है विटामिन-D?
विटामिन-D कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। यह इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने और हार्मोनल संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। कमी होने पर हड्डियों में दर्द, कमजोरी, थकान, बार-बार संक्रमण और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा जा सकता है।
बचाव के आसान तरीके
- रोजाना 15–30 मिनट धूप में रहें (सुबह 10 से पहले या शाम 4 के बाद)।
- डाइट में विटामिन-D युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें (अंडा, फोर्टिफाइड दूध, फैटी फिश)।
- डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।
- एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं और नियमित हेल्थ चेक-अप कराएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर विटामिन-D की कमी से होने वाले जोखिमों को काफी हद तक रोका जा सकता है।





