ब्रेस्ट में होने वाली 80% से अधिक गांठें नॉन-कैंसरस, स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

अक्सर ब्रेस्ट में गांठ महसूस होते ही महिलाओं को कैंसर का डर सताने लगता है, लेकिन एक नई स्टडी के अनुसार ब्रेस्ट में पाई जाने वाली करीब 80 से 85 प्रतिशत गांठें नॉन-कैंसरस होती हैं। यानी हर गांठ कैंसर नहीं होती, बल्कि कई मामलों में यह ऊतकों की असामान्य वृद्धि या तरल पदार्थ से भरे सिस्ट के कारण बनती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रेस्ट में गांठ का सबसे आम कारण फाइब्रोसिस्टिक बदलाव हैं, जो हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण होते हैं और लगभग आधी से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करते हैं। वहीं 18 से 35 वर्ष की महिलाओं में फाइब्रोएडेनोमा अधिक पाया जाता है, जो सामान्यतः दर्द रहित और गैर-कैंसरकारी होता है।

हालांकि डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि सख्त, एक जगह स्थिर और दर्द रहित गांठ, निप्पल से खून जैसा डिस्चार्ज, त्वचा में गड्ढे या आकार में बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। किसी भी गांठ की सही प्रकृति जानने के लिए बायोप्सी सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है, जिसमें अधिकांश मामलों में गांठ बेनाइन ही निकलती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय नियमित सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जाम और समय पर डॉक्टरी सलाह ही ब्रेस्ट कैंसर से बचाव की सबसे प्रभावी रणनीति है।

Related Articles

Back to top button