मिशेल ओबामा ने शेयर किए पेरेंटिंग अनुभव, कहा- बच्चों को मजबूत बनाना जरूरी

अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने मातृत्व और बच्चों की परवरिश को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि मां होने का मतलब बच्चों को हर मुश्किल से बचाना नहीं, बल्कि उन्हें चुनौतियों से लड़ना सिखाना है।

मिशेल ओबामा ने लिखा कि बेटियों के जन्म के बाद उनकी जिंदगी का केंद्र बदल गया। वह चाहती थीं कि उनकी बेटियां आत्मनिर्भर, संवेदनशील और अपनी आवाज उठाने वाली बनें। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस में रहने के बावजूद उन्होंने बेटियों को जिम्मेदारियां निभाना सिखाया। वे अपना बिस्तर खुद ठीक करती थीं और घर के काम भी करती थीं।

उन्होंने कहा कि माता-पिता का सबसे कठिन काम बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और धीरे-धीरे उन्हें अपनी राह पर आगे बढ़ने देना है। मिशेल ने यह भी स्वीकार किया कि बेटियों के जन्म से पहले उन्होंने गर्भपात का दर्द झेला था, जिससे वह भावनात्मक रूप से टूट गई थीं।

मिशेल ओबामा के मुताबिक, आज की दुनिया में बच्चों की परवरिश पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है। सोशल मीडिया, लगातार तुलना और सौंदर्य के दबाव के बीच मां-बाप बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख सकते, लेकिन उन्हें मजबूत सोच और संघर्ष से उबरने की ताकत जरूर दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों को असफलता और निराशा का अनुभव भी होना चाहिए, क्योंकि असली ताकत कठिनाइयों से गुजरकर ही आती है। मिशेल ने अपनी मां मेरियन रॉबिन्सन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें सिखाया कि बच्चों को हर समय दखल नहीं, बल्कि सुरक्षा, ध्यान और बिना शर्त प्यार की जरूरत होती है।

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