मंत्रियों का डिजिटल रिपोर्ट कार्ड: सोशल मीडिया में पीएम मोदी अव्वल, युवा वोटरों तक पहुंच का नया प्लान

केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों की सोशल मीडिया सक्रियता और जनता के साथ उनके जुड़ाव का आकलन शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी सबसे आगे रहे।
रिपोर्ट में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंत्रियों की सक्रियता का विश्लेषण किया गया। इसमें औसत दैनिक पोस्ट, कुल जुड़ाव, प्रति पोस्ट औसत प्रतिक्रिया, लाइक्स और फॉलोअर्स जैसे पैमानों को शामिल किया गया। कुछ आकलनों में एक मई से 15 अगस्त, 2026 के बीच की सोशल मीडिया गतिविधियों को आधार बनाया गया।
युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर
सरकार अब सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। मंत्रियों को उन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक सक्रिय रहने के लिए कहा गया है, जहां युवा बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
नई रणनीति के तहत छोटे वीडियो, कम औपचारिक कंटेंट और सहज बातचीत वाले फॉर्मेट पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। मकसद सोशल मीडिया पर नेताओं की मौजूदगी को अधिक स्वाभाविक और युवाओं के लिए सहज बनाना है।
स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भी बढ़ेगा संवाद
सरकार सिर्फ डिजिटल माध्यमों तक सीमित नहीं रहना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद करने की सलाह दी है।
जनसंपर्क अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया को दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को समझने और उनके साथ सीधा संवाद स्थापित करने की रणनीति को मजबूत करना है।
स्नैपचैट समेत नए प्लेटफॉर्म पर भी फोकस
युवाओं के बीच लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में सरकार नए माध्यमों पर भी सक्रिय हो रही है। विदेश मंत्रालय ने सात अगस्त को स्नैपचैट पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा की थी। इसे भी युवाओं तक पहुंच बनाने की व्यापक डिजिटल रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी 2014 से ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए जनता से सीधे संवाद करते रहे हैं। अब सरकार और केंद्रीय मंत्रियों के लिए इस डिजिटल पहुंच को और व्यापक बनाने के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीधे संवाद पर भी जोर दिया जा रहा है।





