युवाओं में तेजी से बढ़ रहा बांझपन, लाइफस्टाइल और गलत डाइट बड़ी वजह

भारत में इंफर्टिलिटी (बांझपन) एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में हर 6 में से 1 कपल संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहा है। यह समस्या अब सिर्फ उम्र बढ़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और नवविवाहित दंपतियों में भी तेजी से बढ़ रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इंफर्टिलिटी को एक बीमारी माना जाता है, जिसमें पुरुष और महिला—दोनों की भूमिका हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण हैं।
क्या डाइट सुधारकर मिल सकता है फायदा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इंफर्टिलिटी के कई मामलों में डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार से सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। सही पोषण न सिर्फ हार्मोन बैलेंस सुधारता है, बल्कि अंडाणु (एग) और शुक्राणु (स्पर्म) की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार—
- हरी सब्जियां, फल, नट्स और साबुत अनाज डाइट में शामिल करें
- प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन लें
- प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और ज्यादा चीनी से परहेज करें
- कैफीन, शराब और तंबाकू का सेवन सीमित या बंद करें
- पुरुषों और महिलाओं—दोनों के लिए जरूरी बदलाव
डॉक्टरों का कहना है कि इंफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं से जोड़कर देखना गलत है। भारत में करीब 40–50% मामलों में पुरुष कारण भी जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में दोनों पार्टनर्स को साथ मिलकर डाइट सुधारने, नियमित व्यायाम करने और तनाव कम करने की जरूरत होती है।
कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह?
अगर एक साल तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। समय पर जांच और सही उपचार से कई मामलों में इंफर्टिलिटी का इलाज संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर मेडिकल सलाह अपनाकर इंफर्टिलिटी की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।





