टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बारे में जरूरी बातें, हर किसी को होनी चाहिए जानकारी

डायबिटीज (मधुमेह) सभी उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। बच्चों और युवाओं तक को इससे सुरक्षा नहीं मिली है। 5 साल से कम उम्र के बच्चे और जन्मजात बच्चे भी इस रोग की चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है। समय पर ध्यान न देने पर उच्च शुगर लेवल किडनी, आंख, तंत्रिकाओं और दिल की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है।
डायबिटीज के सामान्य प्रकार:
टाइप-1 डायबिटीज: ऑटोइम्यून बीमारी, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। आमतौर पर बच्चों और युवाओं में होती है।
टाइप-2 डायबिटीज: सबसे आम प्रकार, जो गलत खानपान, मोटापा, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली से जुड़ा होता है।
नए प्रकार के डायबिटीज:
टाइप-1.5 (LADA): टाइप-1 का हाइब्रिड रूप, आमतौर पर 30 वर्ष से अधिक उम्र में होता है। इसके लक्षण टाइप-2 की तरह हो सकते हैं, लेकिन समय पर निदान और इंसुलिन इलाज जरूरी है। भारत में इसके मरीजों की संख्या 5-10% तक हो सकती है।
टाइप-5 डायबिटीज: यह मुख्य रूप से दुबले-पतले किशोर और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। दुनियाभर में लगभग 2.5 करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं। पर्याप्त भोजन न मिलने या बचपन में कुपोषण इसे बढ़ाने का मुख्य कारण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-1.5 और टाइप-5 जैसी नई किस्मों की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि समय पर निदान और इलाज किया जा सके।





