भारत में बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा, मिथ और फैक्ट्स जानकर समय पर बचाव संभव

भारतीय आबादी में कैंसर के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। पुरुषों में फेफड़े, मुंह और लिवर कैंसर का खतरा जबकि महिलाओं में स्तन, सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं, ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर के तेजी से बढ़ते मामले काफी चिंताजनक हैं। युवा हों या बुजुर्ग सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। गुटखा, खैनी, पान-मसाला या धूम्रपान को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है।

इन उत्पादों में मौजूद निकोटीन और हानिकारक रसायन मुंह की परत को नुकसान पहुंचाते हैं और धीरे-धीरे मुंह के अंदर घाव बनाते जाते हैं जो कैंसर में बदल सकते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि सिर्फ सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू ही इस कैंसर का कारण हैं, हालांकि अध्ययनों से पता चलता है शराब का सेवन भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।

अध्ययनकर्ता बताते हैं, कुछ लोगों में मुंह और गले का कैंसर एचपीवी नाम के वायरस की वजह से भी होता है। यह वायरस यौन संबंधों के दौरान फैल सकता है। अब भारत में भी इसके मामले भी बढ़ रहे हैं। आमतौर पर लोग मुंह में होने वाले छोटे-छोटे घाव या सफेद-लाल दाग को गंभीर नहीं मानते। वे महीनों इलाज टालते रहते हैं। हालांकि ये लापरवाही आप पर भारी पड़ सकती है। मुंह के कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी भी इसके बढ़ते मामलों का कारण हो सकती है। आइए ओरल कैंसर से जुड़े कुछ मिथ्य-फैक्ट्स के बारे में जानते हैं।

मिथ- सिर्फ बीड़ी-सिगरेट से ही मुंह का कैंसर होता है

अक्सर से लोग मानते हैं कि मुंह का कैंसर केवल उन लोगों को होता है जो सिगरेट या बीड़ी पीते हैं। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है।

भारत में ओरल कैंसर के सबसे ज्यादा मामले उन लोगों के देखे जाते हैं जो गुटखा, खैनी, पान-मसाला या सुपारी चबाते हैं। ये चीजें मुंह के अंदर लंबे समय तक रहती हैं और उनके जहरीले केमिकल सीधे मुंह की परत को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सफेद या लाल दाग, बार-बार होने वाले घाव और बाद में कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। सुपारी और गुटखा में पाए जाने वाले रसायनों और तंबाकू दोनों को वैज्ञानिकों ने कैंसरजनक माना है।

मिथ- मुंह का कैंसर सिर्फ बुजुर्गों को होता है

क्या आपको भी लगता है कि यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों को होती है?

आंकड़े बताते हैं, मौजूदा के समय में महिलाएं और युवा भी बड़ी संख्या में इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। गुटखा, पान-मसाला और सुपारी जैसी चीजों का युवाओं और महिलाओं में भी तेजी से इस्तेमाल बढ़ा है। कई युवा फैशन या दोस्तों की नकल में ये आदतें शुरू करते हैं और बाद में लत पड़ जाती है। इसके अलावा, एचपीवी वायरस भी युवाओं में इस कैंसर का कारण बन रहा है।

मिथ- मुंह में छोटे-छोटे अल्सर या दाग सामान्य हैं।

मुंह के बार-बार छाले, घाव या दाग आम बात है और खुद-ब-खुद ठीक हो जाएंगे, अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो सावधान हो जाएं। कुछ मामलों में यह सच भी होता है, जैसे दांत से चोट लगना या विटामिन की कमी के कारण छाले हो सकते हैं। लेकिन अगर मुंह में कोई घाव या सफेद-लाल दाग दो हफ्ते से ज्या दा समय तक बना रहे, उसमें खून आए या वह धीरे-धीरे बड़ा हो, तो यह गंभीर संकेत है। ऐसे घाव प्री-कैंसर वाले हो सकते हैं, यानी बाद में कैंसर में बदल सकते हैं। इनपर समय रहते गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।

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