धराली आपदा के बाद अलर्ट: तेलगाड में बनी झील पर निगरानी तेज, सेना कैंप तबाह होने का खुलासा

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में धराली आपदा को एक वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन तेलगाड क्षेत्र में बना खतरा अब भी बरकरार है। पिछले वर्ष पांच अगस्त को खीर गंगा में आई भीषण तबाही के कुछ ही देर बाद तेलगाड से आए मलबे ने हर्षिल स्थित सेना के कैंप को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें नौ सैनिक लापता हो गए थे। इसी दौरान भारी मलबे से भागीरथी नदी का प्रवाह बाधित होने के कारण करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी अस्थायी झील बन गई थी।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि लगातार बारिश की स्थिति में यह झील भविष्य में फिर बड़े खतरे का कारण बन सकती है। हाल ही में जलस्तर बढ़ने से हर्षिल में नदी किनारे कटाव हुआ, जिससे कई आवासीय और सरकारी भवनों पर संकट गहरा गया। प्रशासन ने नदी को चैनलाइज कर अस्थायी सुरक्षा कार्य शुरू कराए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के एक साल बाद भी स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रशासन ने केवल नदी का मार्ग बदलने का काम किया है, जबकि झील की सुरक्षित निकासी और तेलगाड क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हर्षिल क्षेत्र को दोबारा भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
धराली में खीर गंगा आपदा के निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं। कई हेक्टेयर भूमि अब भी मलबे से ढकी हुई है और बहुमंजिला भवन, सेब के बगीचे तथा अन्य ढांचे पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून के साथ भय लौट आता है और वे सुरक्षित भविष्य के लिए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
आपदा की पहली बरसी पर ग्रामीणों ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, विशेष पूजा-पाठ किया और 101 पौधे लगाकर दिवंगतों की स्मृति को नमन किया।





