जलभराव से परेशान बच्चों ने निगम दफ्तर को बनाया स्कूल, अधिकारियों के सामने लगाई क्लास

कृष्णानगर में जलभराव की समस्या से परेशान स्कूली बच्चों ने शुक्रवार को अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। स्कूल जाने वाले रास्ते में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई तो छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक तीन बसों में सवार होकर सीधे नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। यहां बच्चों ने नगर आयुक्त के कक्ष को ही अस्थायी कक्षा में बदल दिया।
कार्यालय में ब्लैकबोर्ड लगाया गया और बच्चे कतार में बैठ गए। इसके बाद शिक्षकों ने उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया। नगर निगम कार्यालय में बच्चों की पढ़ाई का यह नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। इस अनोखे विरोध के जरिए स्कूल प्रबंधन ने प्रशासन को संदेश दिया कि अगर जलभराव के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सकते तो उनकी पढ़ाई नगर निगम कार्यालय में ही कराई जाएगी।
कृष्णानगर की गली नंबर-20 में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं। लगातार हुई बारिश के बाद इलाके की सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया। रास्ते में जलभराव के कारण स्कूल को बंद करना पड़ा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई।
नगर निगम पहुंचने के बाद जहां एक ओर बच्चे कक्षा में पढ़ाई करते रहे, वहीं दूसरी ओर अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने जलभराव के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पानी निकासी को लेकर निगम की ओर से किए गए दावों और जमीनी स्थिति में अंतर है। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
कुछ छात्राओं ने भी अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि रोज पानी से होकर स्कूल जाने के कारण यूनिफॉर्म, जूते और किताबें खराब हो जाती हैं। बरसात के दिनों में स्कूल पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
बढ़ते दबाव के बाद नगर निगम अधिकारियों ने क्षेत्र में टैंकर भेजकर पानी निकालने की कार्रवाई शुरू कराई। हालांकि स्कूल प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने केवल अस्थायी राहत के बजाय जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक कृष्णानगर में बेहतर जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय लोगों की जिंदगी प्रभावित होती रहेगी।





