EMI का दबाव कम करें, समझदारी से चुकाएं लोन; जानें क्या करें और क्या नहीं

आज के समय में लोन लेना आसान हो गया है, लेकिन उसकी मासिक किस्त यानी EMI कई लोगों के लिए लंबे समय तक वित्तीय दबाव का कारण बन जाती है। अक्सर लोग कम EMI के लालच में लंबा लोन टेन्योर चुन लेते हैं या बिना पूरी जानकारी के कर्ज ले लेते हैं, जिससे ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता जाता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना और अनुशासित भुगतान के जरिए न केवल EMI का दबाव कम किया जा सकता है, बल्कि लोन को तय समय से पहले भी खत्म किया जा सकता है।

EMI मुख्य रूप से लोन राशि, ब्याज दर और टेन्योर पर निर्भर करती है। लंबी अवधि चुनने पर EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। वहीं, कम अवधि में EMI अधिक होती है, लेकिन ब्याज का खर्च कम रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लोन लेने वालों की सबसे बड़ी गलतियों में जरूरत से ज्यादा कर्ज लेना, लंबा टेन्योर चुनना, ब्याज दरों की तुलना न करना, समय पर EMI न भरना और कई अनावश्यक EMI एक साथ चलाना शामिल है।

EMI का बोझ कम करने के लिए समय-समय पर प्री-पेमेंट करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। अतिरिक्त आय या बोनस मिलने पर लोन का कुछ हिस्सा पहले ही जमा कर देने से बकाया राशि और कुल ब्याज दोनों कम हो जाते हैं। इसके अलावा कम ब्याज दर वाले बैंक में बैलेंस ट्रांसफर, अधिक डाउन पेमेंट और आय बढ़ने पर EMI बढ़ाने जैसे विकल्प भी मददगार साबित हो सकते हैं।

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि एक से अधिक लोन होने की स्थिति में सबसे अधिक ब्याज वाले कर्ज को पहले चुकाना चाहिए। इससे कुल वित्तीय बोझ तेजी से कम होता है।

हालांकि, हर स्थिति में लोन जल्दी खत्म करना ही सबसे बेहतर रणनीति नहीं होती। यदि ब्याज दर कम है और निवेश से अधिक रिटर्न मिल रहा है, तो अतिरिक्त राशि को निवेश करना भी फायदेमंद हो सकता है। साथ ही लोन चुकाने से पहले पर्याप्त इमरजेंसी फंड बनाए रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समझदारी से बनाई गई वित्तीय योजना, समय पर EMI भुगतान और अनावश्यक कर्ज से दूरी ही आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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