हल्की सी चोट से भी टूट सकती हैं हड्डियां, डॉक्टरों ने बताया इस बीमारी का बड़ा खतरा

आजकल हड्डियों और जोड़ों के दर्द की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है। अब 30 वर्ष से कम उम्र के युवा भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खराब दिनचर्या, तनाव, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण हड्डियों की मजबूती पर बुरा असर पड़ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 15 से 20 प्रतिशत आबादी यानी करीब 18 करोड़ लोग गठिया (आर्थराइटिस) और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बीमारियों में हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और खोखली होती जाती हैं, जिससे हल्की चोट या मामूली गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

हर साल 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को हड्डियों के स्वास्थ्य और रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक किया जा सके। इस वर्ष की थीम है “इट्स अनएक्सपेक्टेड” (It’s Unacceptable) — यानी यह अस्वीकार्य है कि एक ऐसी बीमारी, जिससे आसानी से बचा जा सकता है, आज भी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर ध्यान देकर इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर आहार, नियमित व्यायाम, और पर्याप्त धूप हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रख सकते हैं। लगातार कमर या पीठ दर्द, झुककर चलने की स्थिति या बार-बार फ्रैक्चर होना ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में समय रहते डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी है।

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