भारत की तरक्की पर संदेह करने वालों पर सीतारमण का तंज, बोलीं- ‘नाराज फूफा’ मौका नहीं छोड़ते

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, युवा शक्ति और तकनीकी क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को देश की ताकत बताते हुए उन लोगों पर तंज कसा, जो लगातार भारत की प्रगति और युवाओं की क्षमताओं पर सवाल उठाते हैं।

सीतारमण ने ऐसे संशयवादियों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘नाराज फूफाजी’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये लोग भारत की आगे बढ़ने की गति और युवाओं की क्षमता पर संदेह करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसे लोगों के पास सवाल उठाने के कारण कभी कम नहीं पड़ते और वे टेलीविजन स्टूडियो में बैठकर इस बात पर बहस करते हैं कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश कहीं बोझ तो नहीं बन गया।

भारत के लिए ताकत है युवा आबादी

वित्त मंत्री ने इस सोच को खारिज करते हुए कहा कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यही देश के भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है।

उन्होंने भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। सीतारमण के अनुसार, देश अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का वास्तविक समय में अनुभव कर रहा है। भारत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में अग्रणी है और यूपीआई के जरिये बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी देश नए आयाम स्थापित कर रहा है।

तकनीकी परिवेश मजबूत करने पर जोर

वित्त मंत्री ने व्यापक भारतीय प्रौद्योगिकी परिवेश को एक साथ लाने के लिए संघीय उद्योग मंच बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक से थोक और खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के पायलट को आगे बढ़ाने का सुझाव भी दिया। उनके मुताबिक इससे डिजिटल वित्तीय प्रणाली मजबूत होने के साथ नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

एआई को बताया दोधारी तलवार

सीतारमण ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को दोधारी तलवार बताते हुए इसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी करने के लिए भी हो सकता है। इसलिए नवाचार और दक्षता बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नई तकनीक किसी नई प्रणालीगत कमजोरी को जन्म न दे।

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