वंदे मातरम पर घमासान: प्रियांक खरगे ने कहा- भाजपा से देशभक्ति क्यों सीखें, गांधी-नेहरू हमारे आदर्श

कर्नाटक सरकार के सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पद गाने के फैसले का कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर, सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू जैसे वरिष्ठ नेताओं की परंपरा के अनुरूप है।
‘हमने वही किया जो हमारे बुजुर्गों ने कहा’
भाजपा और आरएसएस की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि कांग्रेस और कर्नाटक सरकार को उनसे कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वही किया है जो देश के वरिष्ठ नेताओं ने बताया था।
खरगे ने कहा कि गांधी, बोस, टैगोर, पटेल और नेहरू समेत कई नेताओं के फैसलों और उनके बताए रास्ते का पालन किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा के लोग इन नेताओं से बड़े हैं?
‘भाजपा से देशभक्ति का पाठ क्यों सीखें?’
प्रियांक खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ भाजपा या आरएसएस से सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अंग्रेजों से पेंशन लेने वालों का संदर्भ देते हुए भाजपा से आजादी के आंदोलन में उनके योगदान को लेकर सवाल भी किया।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार का फैसला उन लोगों के निर्णय के अनुरूप है, जिन्होंने देश के लिए संघर्ष किया और अपना जीवन बलिदान किया।
क्या है वंदे मातरम को लेकर विवाद?
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद गाने का आदेश दिया है। हालांकि, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रम इसके अपवाद होंगे।
इससे पहले जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ एक साथ बजाए जाएं तो ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पद गाए जाएं। यह निर्देश राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में जारी किया गया था।
वहीं, कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था, जिसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पद गाए जाएंगे।
ईडी की कार्रवाई पर भी साधा निशाना
पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली के खिलाफ हाल में हुई ईडी की छापेमारी को प्रियांक खरगे ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ ही क्यों हो रही है।
खरगे ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 196 छापे मारे गए, लेकिन इनमें केवल दो मामलों में दोषसिद्धि हुई है।
वहीं, भाजपा नेता आर. अशोक के उस दावे पर कि केपीएससी से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में खरगे समेत दो अन्य मंत्री जल्द इस्तीफा दे सकते हैं, उन्होंने भाजपा नेताओं को सबूत या दस्तावेज पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के बयान देने के बजाय उनके इस्तीफे की मांग की जाए।





