भारत की डिजिटल ताकत का दुनिया में डंका, फिनटेक निर्यात में 80 अरब डॉलर तक की संभावना

भारत के फिनटेक क्षेत्र के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में कहा कि भारत अपने फिनटेक अनुभव, डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल कर वित्तीय सेवाओं के निर्यात को मौजूदा करीब 8 अरब डॉलर से बढ़ाकर 60 से 80 अरब डॉलर तक ले जा सकता है।
डिजिटल क्षमता को दुनिया तक पहुंचाने का मौका
अग्रवाल ने कहा कि भारत ने बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में जो अनुभव हासिल किया है, उसे अब दूसरे देशों तक पहुंचाने की जरूरत है। यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की बड़ी ताकत हैं। इनके आधार पर भारतीय कंपनियां एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उन बाजारों में समाधान विकसित कर सकती हैं, जहां वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ अपने उत्पादों को दूसरे देशों में बेचने के बजाय स्थानीय जरूरतों के मुताबिक फिनटेक समाधान विकसित करने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए सरकार, नियामकों, स्टार्टअप, वित्तीय संस्थानों और दूसरे देशों के साझेदारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
ई-कॉमर्स निर्यात को भी मिलेगा फिनटेक का सहारा
वाणिज्य सचिव ने ई-कॉमर्स निर्यात को भी बड़ा अवसर बताया। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता अभी बड़ी चुनौती है। कई छोटे कारोबारियों के पास पर्याप्त क्रेडिट हिस्ट्री या गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं होती।
ऐसे में फिनटेक कंपनियां ऑर्डर और कारोबार से जुड़े आंकड़ों के आधार पर छोटी अवधि के कर्ज और वित्तीय समाधान उपलब्ध करा सकती हैं। सरकार ई-कॉमर्स निर्यातकों की मदद के लिए निर्यात ऋण कार्ड जैसी पहल पर भी काम कर रही है।
वैश्विक बाजार में भरोसा सबसे जरूरी
अग्रवाल ने कहा कि भारतीय फिनटेक कंपनियों को वैश्विक स्तर पर विस्तार करते समय साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और भरोसे पर विशेष ध्यान देना होगा। अलग-अलग देशों के नियामकीय मानकों के अनुरूप समाधान तैयार करना भी जरूरी होगा।
उन्होंने फिनटेक में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया। एआई का इस्तेमाल धोखाधड़ी की पहचान, जोखिम प्रबंधन और सेवाओं की दक्षता बढ़ाने में किया जा सकता है।
23 देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर समझौते
भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग के लिए करीब 23 देशों के साथ समझौते और एमओयू किए हैं। वहीं, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं को भी महत्वपूर्ण जगह मिल रही है।
अग्रवाल के मुताबिक, भारत ने पिछले पांच वर्षों में नौ व्यापार समझौते किए हैं, जिनसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों तक पहुंच के अवसर बढ़े हैं। वित्तीय सेवाओं को भी इन समझौतों के जरिए विदेशी बाजारों में विस्तार का रास्ता मिल सकता है।
GIFT City को बनाया जा सकता है वैश्विक वित्तीय केंद्र
वाणिज्य सचिव ने गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर को भी वित्तीय सेवाओं के निर्यात का संभावित वैश्विक गेटवे बताया। उनका कहना है कि भारत अपने घरेलू बाजार को नई तकनीकों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल कर सकता है और सफल समाधानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।
अग्रवाल ने भारतीय फिनटेक कंपनियों को घरेलू बाजार से आगे सोचने की जरूरत बताते हुए कहा कि भारत में समाधान तैयार करते समय उन्हें दुनिया की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। इससे फिनटेक भारत के सेवा निर्यात का नया और बड़ा आधार बन सकता है।





