नेतन्याहू के सामने बड़ी चुनौती: इस्राइल चुनाव में 7 अक्टूबर का हमला बनेगा मुद्दा, क्या जनता देगी सत्ता में वापसी का मौका?

इस्राइल में 27 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में वापसी के लिए सुरक्षा और सैन्य कार्रवाई के मुद्दे पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले हुई सुरक्षा चूक को लेकर जनता की नाराजगी अब भी बरकरार है।
सुरक्षा चूक बनी चुनाव का बड़ा मुद्दा
हमास के हमले और गाजा व ईरान के साथ युद्ध के बाद हो रहे इस चुनाव को नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। तेल अवीव समेत कई इलाकों में हजारों प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों और बंधकों के परिजनों का आरोप है कि प्रधानमंत्री 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी खुफिया और सुरक्षा विफलताओं की स्वतंत्र जांच से बच रहे हैं।
इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी सरकार को घेर रहे हैं। विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट को नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में गिना जा रहा है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भी उन्हें मजबूत चुनौती देने वाले नेता के तौर पर पेश किया गया है।
सैन्य कार्रवाई के दम पर वोट मांग रहे नेतन्याहू
नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार में अपनी सुरक्षा नीतियों और सैन्य कार्रवाई को प्रमुखता दी है। गाजा, लेबनान और ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर वह दक्षिणपंथी मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार बनाने के लिए संसद में 120 में से कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है।
ईरान के परमाणु खतरे का मुद्दा उठाया
चुनाव से पहले नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एआई से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें इस्राइल पर परमाणु हमला दिखाया गया था। उन्होंने ईरान के संभावित परमाणु हथियारों को इस्राइल के अस्तित्व के लिए खतरा बताया। वहीं, विपक्षी नेता यायर गोलान ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव में लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर रहे हैं।
चुनाव प्रचार में एआई और डीपफेक का इस्तेमाल
इस्राइल के चुनावी माहौल में सोशल मीडिया बॉट्स, डीपफेक वीडियो और एआई से तैयार सामग्री का इस्तेमाल भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों राजनीतिक खेमे ऑनलाइन प्रचार में एआई आधारित वीडियो का सहारा ले रहे हैं। कुछ वीडियो में नेतन्याहू को 7 अक्टूबर के हमले से पहले हुई कथित सुरक्षा विफलताओं पर सवालों का सामना करते दिखाया गया है।
अब सबकी नजरें मतदान पर टिकी हैं। चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि नेतन्याहू जनता का भरोसा दोबारा हासिल कर पाते हैं या सुरक्षा चूक और सरकार के खिलाफ असंतोष उनकी सत्ता के लिए बड़ी चुनौती साबित होता है।





