स्टारलिंक की भारत में एंट्री रोकने की मांग: RSS से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा पर जताई चिंता

स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि स्टारलिंक के उपग्रह लेजर लिंक के जरिए एक-दूसरे से डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। संगठन को आशंका है कि इससे भारत का इंटरनेट ट्रैफिक घरेलू गेटवे से गुजरे बिना विदेशी नेटवर्क तक पहुंच सकता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए कानूनी निगरानी और नियमों को लागू करना मुश्किल हो सकता है।

संगठन ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी आपातकालीन परिस्थितियों में सरकार जरूरत पड़ने पर किसी खास क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित कर सके, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। उसके मुताबिक, स्टारलिंक की तकनीक में इस तरह के नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। ये संगठन की ओर से उठाई गई चिंताएं हैं; इन्हें स्टारलिंक के खिलाफ साबित हो चुके उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट को बढ़ावा देने की मांग

स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि भारत को अपनी घरेलू तकनीक और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। संगठन का दावा है कि स्वदेशी सेवाएं राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सस्ती इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकती हैं।

मंच ने यह भी कहा कि स्टारलिंक को अनुमति नहीं देने का अर्थ यह नहीं होगा कि भारत सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं से वंचित रह जाएगा। उसके मुताबिक, घरेलू तकनीक के विकास से दूरदराज के क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने के विकल्प मजबूत किए जा सकते हैं।

क्या भारत में स्टारलिंक की सेवा शुरू हो गई है?

फिलहाल स्टारलिंक की भारत में व्यावसायिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की अनुमति को लेकर नियामकीय प्रक्रिया अहम है। 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, लेकिन उसे अभी मंजूरी नहीं मिली है। आवेदन को खारिज भी नहीं किया गया है।

स्वदेशी जागरण मंच की मांग के बाद अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा नियंत्रण और घरेलू सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, स्टारलिंक के लाइसेंस पर अंतिम फैसला सरकार और संबंधित नियामक प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।

Related Articles

Back to top button