रेयर अर्थ मैग्नेट में आत्मनिर्भरता के लिए पांच स्तंभों वाली रणनीति बने, प्राइमस पार्टनर्स की रिपोर्ट

एडवाइजरी फर्म प्राइमस पार्टनर्स की एक रिपोर्ट ने भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पांच स्तंभों वाला विस्तृत खाका पेश किया है। इसका उद्देश्य देश के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के भविष्य को सुरक्षित करना और चीनी आयात पर लगभग पूरी निर्भरता को कम करना है।

“फ्रॉम एक्सट्रैक्शन टू इनोवेशन: ए ब्लूप्रिंट फॉर एन्हांसिंग रेयर अर्थ मैग्नेट इकोसिस्टम इन इंडिया’ EV रोडमैप” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में खनिजों के अपस्ट्रीम उत्खनन से लेकर डाउनस्ट्रीम मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग तक की रणनीति का प्रस्ताव है। यह मैग्नेट ईवी के अलावा पवन टर्बाइन और रक्षा तकनीकों के लिए भी अहम हैं।

मार्केट एश्योरेंस को दिया प्रमुख स्थान
प्राइमस पार्टनर्स की रिपोर्ट में भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन के लिए प्रस्तावित पांच स्तंभों में ‘मार्केट एश्योरेंस’ को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके तहत सरकार समर्थित मूल्य गारंटी और ऑटो, रक्षा व नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के साथ दीर्घकालिक ऑफ-टेक समझौते करने की सिफारिश की गई है।

इसने ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज समृद्ध राज्यों में एकीकृत पायलट-स्केल क्लस्टर स्थापित करने और मैग्नेट के उत्पादन में तेजी से वृद्धि करने के लिए तीन औद्योगिक चैंपियनों की पहचान करने का सुझाव दिया।

नेशनल रेयर अर्थ इनोवेशन हब पर दिया जोर
इसमें नेशनल रेयर अर्थ इनोवेशन हब शुरू करने की सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य रीसाइक्लिंग, मैग्नेट की दक्षता और प्रोसेस टेक्नोलॉजी में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक रीसाइक्लिंग से वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट की मांग का 40 किलो टन तक आपूर्ति की जा सकती है।

मैग्नेट इकोसिस्टम समन्वय सेल
रिपोर्ट में आगे मैग्नेट इकोसिस्टम समन्वय सेल बनाने का सुझाव दिया गया है, जो विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल बिठाएगा, मंजूरियों में तेजी लाएगा और 3 से 5 साल की रणनीतिक अवधि में प्रगति की निगरानी करेगा।

90% से अधिक मैग्नेट आयात चीन से होता है
भारत का 90% से अधिक मैग्नेट आयात चीन से होते हैं, जो वैश्विक मैग्नेट निर्माण में 92% हिस्सेदारी रखता है। हाल ही में चीन में निर्यात प्रतिबंध और सीमा शुल्क में देरी के कारण भारतीय कंपनियों, खासकर प्रमुख ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं, की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

वैश्विक मैग्नेट उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम
प्राइमस पार्टनर्स के सह-संस्थापक और अध्यक्ष दविंदर संधू ने कहा कि भारत के पास भंडार और मांग दोनों हैं। फिर भी, पांचवें सबसे बड़े रेयर अर्थ रिसर्व होने के बावजूद, वैश्विक मैग्नेट उत्पादन में हमारी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है। क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के अंतर्गत 34,300 करोड़ रुपये का परिव्यय एक मजबूत शुरुआत है, लेकिन हम संसाधन-समृद्ध और क्षमता-विहीन बने रहने का जोखिम नहीं उठा सकते।

Related Articles

Back to top button