क्या LTCG टैक्स घटने से लौटेंगे विदेशी निवेशक? सेबी की सिफारिश से शेयर बाजार को मिल सकती है राहत

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार हो रही निकासी के बीच लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकार को विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने की सिफारिश की है। पिछले दो वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से करीब 64 अरब डॉलर यानी लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।
फिलहाल कितना लगता है LTCG और STCG टैक्स?
भारत में सूचीबद्ध शेयरों पर फिलहाल शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20 फीसदी और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5 फीसदी टैक्स लगाया जाता है। इसके अलावा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी देना होता है। सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स हटाने की सिफारिश की है। सरकार भी आगामी बजट से पहले इस मामले में निवेशकों और टैक्स विशेषज्ञों से राय ले रही है।
रुपये में मुनाफा, डॉलर में नुकसान की परेशानी
विदेशी निवेशकों के सामने एक बड़ी समस्या रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव भी है। भारत में उनके निवेश पर टैक्स की गणना रुपये में हुए मुनाफे के आधार पर होती है, जबकि विदेशी निवेशक अपने रिटर्न का आकलन डॉलर में करते हैं। ऐसे में रुपये की कीमत गिरने पर डॉलर के हिसाब से नुकसान होने के बावजूद उन्हें रुपये में दिख रहे मुनाफे पर टैक्स देना पड़ सकता है। इसे ‘फैंटम गेन्स’ कहा जाता है।
टैक्स हटने से कितना निवेश लौट सकता है?
जेएम फाइनेंशियल के विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, अगर विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है, तो सबसे अनुकूल स्थिति में वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 से 5 अरब डॉलर का नया निवेश आ सकता है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में हुई 64 अरब डॉलर की निकासी के मुकाबले यह रकम काफी कम है। इससे विदेशी निवेशकों के सालाना डॉलर रिटर्न में करीब 2.2 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
ग्रो के फंड मैनेजर और रिसर्च हेड नीरज करखेरा का कहना है कि केवल टैक्स व्यवस्था आसान करने से विदेशी पूंजी की वापसी सुनिश्चित नहीं हो सकती।
कच्चे तेल की कीमतों का भी पड़ेगा असर
विदेशी निवेश का रुख केवल टैक्स नीतियों पर निर्भर नहीं करता। कच्चे तेल की कीमतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। पिछले दो दशकों के आंकड़ों के अनुसार, जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही है, तब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है। वहीं, कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर से नीचे या 75 डॉलर के आसपास रहने पर निवेश का प्रवाह सकारात्मक रहा है।
किन सेक्टरों को मिल सकता है फायदा?
अगर टैक्स में राहत मिलती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो विदेशी निवेशकों की वापसी का फायदा बड़े शेयरों और उन सेक्टरों को मिल सकता है, जिनमें एफआईआई की हिस्सेदारी अधिक है।
अक्टूबर 2024 के बाद विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में की है। इस क्षेत्र से करीब 16 अरब डॉलर की निकासी हुई। इसके अलावा आईटी और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर से 10-10 अरब डॉलर, ऑयल एंड गैस से 8.4 अरब डॉलर और ऑटो सेक्टर से 8.1 अरब डॉलर निकाले गए।
क्या सिर्फ टैक्स में राहत से लौटेंगे विदेशी निवेशक?
लंबी बिकवाली के बाद निफ्टी का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल घटकर 17.1 गुना पर आ गया है। इसे ऐतिहासिक रूप से निवेश के लिए आकर्षक स्तर माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए टैक्स में राहत के साथ कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।





