चुनाव में सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर, आयोग ने दी तैयारी के लिए अहम गाइडलाइन

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव और जम्मू-कश्मीर समेत छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य बिंदु
- पूर्व-सत्यापन अनिवार्य: सभी राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दल और प्रत्याशी किसी भी डिजिटल या सोशल मीडिया प्रचार से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से अपने विज्ञापनों का पूर्व-सत्यापन कराएं।
- एमसीएमसी की निगरानी: राज्य और जिले स्तर पर बनाई गई एमसीएमसी राजनीतिक विज्ञापनों की जांच करेगी और दिशानिर्देशों के अनुसार मंजूरी देगी।
- भ्रामक समाचार पर कार्रवाई: संदिग्ध मामलों जैसे ‘पेड न्यूज’ पर कड़ी नजर रखी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट: सभी प्रत्याशियों को अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी नामांकन दाखिल करते समय आयोग को देनी होगी।
- चुनावी खर्च का विवरण: सोशल मीडिया और इंटरनेट प्रचार पर हुए खर्च का विवरण चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर देना होगा। इसमें विज्ञापन सामग्री, अकाउंट संचालन और इंटरनेट कंपनियों को भुगतान शामिल हैं।
चुनाव आयोग का यह कदम डिजिटल प्रचार में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।





