
दुनिया के किसी हिस्से में जब भी बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तो राहत और बचाव के लिए भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद एक बार फिर भारत ने तेजी से राहत सामग्री और मेडिकल सहायता पहुंचाकर यह दिखाया है कि संकट के समय वह जरूरतमंद देशों के साथ खड़ा है। पिछले करीब एक दशक में नेपाल, म्यांमार, तुर्किये और मालदीव समेत कई देशों में भारत ने मानवीय सहायता पहुंचाई है।
नेपाल में तेजी से पहुंचाई राहत सामग्री
नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद भारत ने वायुसेना की तीन उड़ानों के जरिए अब तक 57.5 टन राहत सामग्री भेजी है। शुक्रवार को भेजी गई तीसरी उड़ान में 10 टन राहत सामग्री के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और रेस्क्यू एसेसमेंट टीम भी शामिल थी।
इससे पहले भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान ने 37.5 टन मानवीय सहायता सामग्री नेपाल पहुंचाई थी। इसमें राहत सामग्री, दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल थी। राहत सामग्री में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट और जनरेटर जैसे जरूरी सामान भेजे गए।
आपदा के समय ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की भूमिका
भारत पिछले करीब एक दशक में आपदा के समय तेजी से मदद पहुंचाने वाले देशों में अपनी पहचान बना चुका है। भूकंप, बाढ़ और स्वास्थ्य संकट जैसी परिस्थितियों में भारत ने अपनी सैन्य और चिकित्सा क्षमताओं का इस्तेमाल कर प्रभावित देशों तक राहत पहुंचाई है। मानवीय सहायता अब भारत की विदेश नीति और सॉफ्ट पावर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
ऑपरेशन ब्रह्मा: म्यांमार में भूकंप के बाद मदद
म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत और चिकित्सा सहायता भेजी। भारतीय वायुसेना के विमानों से दवाइयां, टेंट, सूखा राशन और बचाव दल पहुंचाए गए। भारतीय नौसेना के जहाजों ने भी राहत सामग्री पहुंचाने में योगदान दिया।
ऑपरेशन दोस्त: तुर्किये में पहुंची भारतीय मदद
2023 में तुर्किये में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत खोज और बचाव विशेषज्ञों तथा मेडिकल टीमों को तुरंत भेजा। भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल ने प्रभावित इलाके में रहकर घायलों का इलाज किया और राहत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन संजीवनी: मालदीव को मिली चिकित्सा सहायता
कोरोना महामारी के दौरान मालदीव में आवश्यक दवाइयों की कमी पैदा हुई थी। भारत ने ऑपरेशन संजीवनी के तहत वायुसेना के विशेष विमान से छह टन से अधिक जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सामग्री मालदीव पहुंचाई। इससे संकट के समय भारत और मालदीव के बीच सहयोग को मजबूती मिली।
नेपाल भूकंप में भी भारत ने बढ़ाया था हाथ
2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन मैत्री चलाया था। भारतीय सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाल पहुंची थीं। टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के साथ खाद्य और चिकित्सा सामग्री भी पहुंचाई।
मानवीय मदद से मजबूत हुई भारत की सॉफ्ट पावर
भारत की मानवीय सहायता केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रही है। पाकिस्तान में 2005 के भूकंप के बाद भारत ने राहत सामग्री भेजने के साथ आर्थिक सहायता का भी वादा किया था। 2010 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान भी भारत ने सहायता उपलब्ध कराई।
कोरोना महामारी के दौरान टीकों की आपूर्ति, श्रीलंका के आर्थिक संकट में मदद और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से नागरिकों की सुरक्षित निकासी जैसे अभियानों में भी भारत ने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल किया है। यही वजह है कि आपदा के समय भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखा जाने लगा है, जो जरूरत पड़ने पर तेजी से सहायता पहुंचाने की क्षमता रखता है।
निष्कर्ष
नेपाल की मौजूदा आपदा में राहत सामग्री, चिकित्सा दल और बचाव विशेषज्ञों की मदद पहुंचाकर भारत ने एक बार फिर मानवीय सहायता के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका दिखाई है। आपदा चाहे किसी भी देश में हो, संकट के समय मदद का हाथ बढ़ाने की भारत की नीति ने उसकी ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ और भरोसेमंद साझेदार की छवि को और मजबूत किया है।





