महंगे डीजल का असर बाजार पर, रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं

डीजल के बढ़ते दामों का असर अब ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में करीब 95 लाख ट्रकों में से लगभग 19 लाख ट्रक सड़कों से हट गए हैं। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि महंगे डीजल और सप्लाई संकट की वजह से ट्रक चलाना मुश्किल हो गया है।

मालभाड़े में भी 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है, खासकर पश्चिम से उत्तर भारत जाने वाले रूट्स पर। लोकल स्तर पर 30 किलोमीटर तक की ढुलाई भी महंगी हो गई है। इसका असर जल्द ही आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है, क्योंकि फल, सब्जी और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ चुके हैं। इस दौरान डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हुआ है। नेशनल हाईवे के पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कई जगह ट्रकों को 6 से 8 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि छोटे ऑपरेटर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ट्रक संचालन की कुल लागत में 40 से 45 फीसदी हिस्सा सिर्फ डीजल का होता है। कई पेट्रोल पंपों ने उधार पर तेल देना बंद कर दिया है, जिससे छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने वर्किंग कैपिटल का संकट खड़ा हो गया है।

हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में डीजल की कमी से इनकार किया है। इंडियन ऑयल समेत अन्य कंपनियों का कहना है कि कुछ इलाकों में अस्थायी दिक्कत है, लेकिन सप्लाई सामान्य बनी हुई है।

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