पानी में गिरने से पहले नहीं खुला फ्लोट सिस्टम, पवन हंस दुर्घटना पर बड़ी रिपोर्ट

अंडमान-निकोबार के मायाबंदर में 24 फरवरी को हुए पवन हंस हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि हादसे के समय हेलिकॉप्टर का इमरजेंसी फ्लोटेशन सिस्टम सक्रिय नहीं था।
यह सिस्टम समुद्र या जल क्षेत्र में दुर्घटना की स्थिति में हेलिकॉप्टर को डूबने से बचाता है और उसे सतह पर तैरने में मदद करता है। रिपोर्ट के अनुसार, पवन हंस लिमिटेड का एयरबस AS365N3 हेलिकॉप्टर रंगहाट से मायाबंदर की ओर जा रहा था, तभी हेलिपैड के पास अचानक तेजी से नीचे आया और समुद्र में गिर गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि समुद्री क्षेत्र में उड़ान के दौरान फ्लोट सिस्टम को पहले से सक्रिय रखना मानक संचालन प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। सिस्टम सक्रिय न होने के कारण पानी से टकराते ही हेलिकॉप्टर अनियंत्रित होकर दाईं ओर पलट गया।
गनीमत रही कि दुर्घटना स्थल पर समुद्र की गहराई केवल चार से पांच फीट थी, जिससे हेलिकॉप्टर का एक हिस्सा पानी के ऊपर रहा और राहत एवं बचाव कार्य संभव हो सका। हादसे में एक यात्री की मौत हो गई, जबकि एक बच्चे समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। दो अन्य को मामूली चोटें आईं। दोनों पायलट सुरक्षित रहे और उन्होंने यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की।
इस लापरवाही के सामने आने के बाद एएआईबी ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है। जांच एजेंसी ने देशभर के हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों के सुरक्षा मानकों की समीक्षा, पायलट प्रशिक्षण को मजबूत करने और यात्रियों के लिए सीट बेल्ट व लाइफ जैकेट नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत बताई है।





