धर्मांतरण मामले में KGMU प्रशासन और पुलिस पर सवाल: शिकायत, पीड़ित और गवाह होने के बाद भी FIR क्यों नहीं?

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए धर्मांतरण मामले में अब एफआईआर दर्ज न होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेष कार्यबल (STF) की जांच में कई डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। रिपोर्ट में पीड़ितों और गवाहों के बयान के साथ कई गंभीर आरोपों का जिक्र है। इसके बावजूद अब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है।

एसटीएफ ने शासन के निर्देश पर इस मामले की जांच की थी। चार दिन पहले सार्वजनिक हुई जांच रिपोर्ट में केजीएमयू में कार्यरत और पूर्व में काम कर चुके कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में धर्मांतरण, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार और कुछ लोगों पर युवतियों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

13 डॉक्टरों समेत करीब 25 लोगों की भूमिका पर सवाल

एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 डॉक्टरों समेत करीब 25 लोगों की भूमिका गंभीर पाई गई है। इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल बताए गए हैं, जो केजीएमयू छोड़कर दूसरी जगह नौकरी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन को एफआईआर दर्ज करानी चाहिए, ताकि मामले की विस्तृत जांच हो सके और आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

छात्राओं के अलग-अलग बैच को बनाते थे निशाना

पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी छात्राओं के अलग-अलग बैच को निशाना बनाते थे। कथित तौर पर पहले एक छात्रा से दोस्ती की जाती थी और फिर उस पर अपनी सहेलियों को गिरोह के अन्य लोगों से मिलवाने का दबाव बनाया जाता था।

आरोप है कि इसके बाद छात्राओं के बीच आपसी विवाद और फूट पैदा की जाती थी, जिससे वे एक-दूसरे से जानकारी साझा नहीं कर पाती थीं। रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कुछ छात्राओं की अश्लील तस्वीरों के जरिए उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया जाता था।

सहेली से मुलाकात के बाद सामने आया मामला

खबर के मुताबिक, केजीएमयू की एक पीड़ित छात्रा की ठाकुरगंज में अपनी पुरानी परिचित से मुलाकात हुई थी। बातचीत के दौरान सहेली ने बताया कि वह रमीज की पत्नी है और उसका धर्मांतरण कराकर निकाह कराया गया था। इसके बाद मामले से जुड़े कई पहलुओं का खुलासा हुआ।

कार्डियो सेवा फाउंडेशन के नाम पर संपर्क करने का आरोप

जांच में हस्साम नाम के आरोपी की भूमिका का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि वह खुद को डॉक्टर बताकर छात्राओं से संपर्क करता था और कार्डियो सेवा फाउंडेशन के नाम पर उन्हें विभिन्न शिविरों में ले जाता था। वहां उनकी मुलाकात अपने दोस्तों और संगठन से जुड़े लोगों से कराता था।

पुलिस की जांच में आरोपी के मोबाइल फोन से डाटा मिटाए जाने और फाउंडेशन के खाते में ऑनलाइन लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है।

विभागीय कार्रवाई की तैयारी, लेकिन FIR पर सवाल

केजीएमयू प्रशासन जांच रिपोर्ट को आगामी विभागीय बैठक में रखने और दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कह रहा है। हालांकि, गंभीर आरोपों और एसटीएफ की जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने से कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

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