बदलते दौर में बदलें गणित पढ़ाने का तरीका: डेटा और रीजनिंग स्किल्स पर जोर जरूरी

गणित का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में स्कूल के दिनों की वे डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं- अलजेब्रा, ज्योमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस का एक अंतहीन चक्रवात… लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गणित के लिए हमने हजारों घंटे बर्बाद किए, वह हमारे वास्तविक जीवन में कितना काम आता है? आधुनिक शोध और विशेषज्ञों का मानना है कि हम न सिर्फ गलत गणित पढ़ रहे हैं, बल्कि उसे आंकने का हमारा तरीका भी पूरी तरह गलत है।

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में गणित का वर्तमान पाठ्यक्रम 1893 की ‘कमेटी ऑफ टेन’ द्वारा निर्धारित किया गया था। उस दौर में रटकर गणना करना (रोट मैथ) आर्किटेक्ट, खगोलविदों और सिविल इंजीनियरों के लिए जरूरी था। पर आज, जब हमारे हाथ में सुपरकंप्यूटर जैसे स्मार्टफोन हैं, तब भी हम बच्चों को हाथ से जटिल समीकरण हल करना सिखा रहे हैं।

‘आफ्टरमैथ: द लाइफ-चेंजिंग मैथ दैट स्कूल्स वॉन्ट टीच यू’ के लेखक टेड डिनर्टस्मिथ कहते हैं। आज की दुनिया डेटा, एल्गोरिदम, सांख्यिकी व एआई से चलती है। पर हमारी शिक्षा नीति अब भी 19वीं सदी के रटने वाले गणित व मल्टीपल चॉइस टेस्ट स्कोर के पीछे भाग रही है।’ एक्सपर्ट मानते हैं अगर कंप्यूटर कोई काम बेहतर व तेज कर सकता है, तो बच्चों को उसी काम में उलझाए रखना गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता।

गणित की अज्ञानता से जोखिम

ओईसीडी के एजुकेशन डायरेक्टर एंड्रियास श्लीचर के मुताबिक गणित की व्यावहारिक समझ न होना अकादमिक कमी नहीं, बल्कि जिंदगी व स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है। डेटा की समझ न होने से लोग मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट व डॉक्टरों द्वारा डेटा की गलत व्याख्या से जीवन-मरण से जुड़े गलत फैसले ले लेते हैं। वहीं, ‘मैथ एंग्जायटी’ के शिकार 93% लोग वित्तीय जाल में फंस रहे हैं; वे महंगाई व ब्याज के गणित को न समझ पाने से निवेश व भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यही अज्ञानता जनता को नीति-निर्धारकों के आंकड़ों के मायाजाल में भी उलझाती है।

80% वक्त गणना पर खर्च हो रहा, इसे एआई-कंप्यूटर को करने दें

अमेरिकी शिक्षाविद् कॉनराड वोल्फ्राम का तर्क है कि हमें ‘डेटा एनालिटिक्स’ व ‘फाइनेंशियल लिटरेसी’ को महत्व देना चाहिए। वर्तमान शिक्षा 80% समय ‘गणना’ पर खर्च करती है, जबकि यह काम कंप्यूटर व एआई कहीं बेहतर कर सकते हैं। छात्रों को गणना के बोझ से मुक्त कर समस्या सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। छात्र सांख्यिकीय तर्क व वित्तीय फैसले सीखें जो जीवन को प्रभावित करते हैं। यदि छात्र स्कूल से निकलने के बाद टैक्स, निवेश या ब्याज दर नहीं समझ सकते, तो उनकी गणित की शिक्षा अधूरी है। इन व्यावहारिक आंकड़ों में दक्षता ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

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