केंद्रीय बलों के कैडर अधिकारी अब न्यायिक हस्तक्षेप के भरोसे, पदोन्नति विवाद पर अदालत करेगी निर्णय

देश के केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के लगभग 20,000 कैडर अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति और वित्तीय लाभों में पीछे रह गए हैं। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इन बलों में ‘संगठित समूह ए सेवा’ (OGAS) लागू होगी और केवल एनएफएफयू (Non-Functional Financial Upgradation) नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए इसका लाभ मिलेगा। इसके लिए छह महीने की समय-सीमा तय की गई थी, जिसमें कैडर रिव्यू भी शामिल था।

हालांकि केंद्र सरकार ने फैसले के खिलाफ रिव्यू पीटिशन दायर कर दी है। अब इस मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि अदालत उनके पक्ष में फैसला सुनाकर पदोन्नति और वित्तीय लाभों में देरी को दूर करेगी।

बीएसएफ और सीआरपीएफ जैसे बलों में 2016 से कैडर रिव्यू नहीं हुआ, जबकि नियम के अनुसार हर पांच साल में रिव्यू होना चाहिए। इससे UPSC से सेवा में आए कैडर अधिकारियों को 15 साल में भी पहली पदोन्नति नहीं मिल पाई।

पूर्व बीएसएफ एडीजी एसके सूद के अनुसार, इन अधिकारियों के पास लंबा अनुभव और कार्य क्षमता है, लेकिन पॉलिसी लेवल पर उनका इस्तेमाल कम किया जाता है। हालांकि, उन्होंने बॉर्डर और आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मई में कैडर अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन सरकार ने रिव्यू पीटिशन दायर कर प्रक्रिया में देरी की। अब केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारी न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए लंबे समय से लंबित पदोन्नति और लाभ हासिल करने की उम्मीद में हैं।

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