ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद ‘ट्रिशुल’ जैसे अभ्यास से बढ़ेगी सीमा पार कार्रवाई की तैयारियाँ

राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय सेना का अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त युद्धाभ्यास होने जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह सबसे बड़ा मिलिट्री एक्सरसाइज माना जा रहा है, जिसमें आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की यूनिट्स एक साथ दुश्मन के ठिकानों पर त्वरित कार्रवाई का प्रदर्शन करेंगी।
31 अक्टूबर से जारी यह अभ्यास ‘त्रिशूल’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। आखिरी दो दिनों में ‘मरू ज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ नाम से बड़े अभ्यास किए जाएंगे। 13वें दिन यानी 11 नवंबर को इसका ग्रैंड फिनाले होगा, जिसे दक्षिणी कमान के वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण करेंगे।
रियल टाइम अटैक की होगी परीक्षा
11 नवंबर को होने वाले इस फाइनल अभ्यास में सेना रेगिस्तान के कठिन इलाकों में आतंकवादी ठिकानों और दुश्मन की अग्रिम चौकियों पर संयुक्त हमला करने की क्षमता दिखाएगी।
इसमें थल सेना की मैकेनाइज्ड और आर्मर्ड कोर (टैंक रेजिमेंट) भाग लेगी, जबकि वायुसेना की तरफ से लड़ाकू हेलीकॉप्टर और हवाई निगरानी प्लेटफॉर्म शामिल रहेंगे। नेवी के कमांडो भी संयुक्त अभियान में हिस्सा लेंगे।
अभ्यास दिन और रात दोनों समय में किया जाएगा, ताकि रियल-टाइम वॉर सिचुएशन और बैक अटैक की तैयारी को परखा जा सके।
दुश्मन के इलाके में घुसकर प्रभुत्व कायम करने का अभ्यास
11 नवंबर को होने वाला ‘अखंड प्रहार’ ऑपरेशन त्रिशूल का ग्रैंड फिनाले होगा। इसका उद्देश्य दुश्मन के इलाके में घुसकर पूर्ण पलटवार (ऑल-आउट ऑफेंसिव) करना है।
तीनों सेनाएं एक साथ हमला कर लाइव फायरिंग, रियल-टाइम वॉर सिचुएशन और मल्टी-डायरेक्शन अटैक का प्रदर्शन करेंगी। इस दौरान आर्टिलरी, टैंक, एयर सपोर्ट और स्पेशल फोर्सेज का संयुक्त संचालन होगा।
अभ्यास का उद्देश्य
इस अभ्यास का मकसद यह साबित करना है कि भारतीय सेना किसी भी परिस्थिति में, विशेषकर रेगिस्तान जैसे कठिन इलाकों में, तेजी से और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है।
साथ ही यह भी दिखाना कि तीनों सेनाएं मिलकर कम से कम समय में दुश्मन को तीनों मोर्चों पर मात देने की क्षमता रखती हैं।





