इस्राइल-हमास संघर्ष के तीन साल: जंग, सीजफायर और तबाही के बाद अब क्या है स्थिति?

7 अक्टूबर 2023 को हमास के इस्राइल पर किए गए हमले को तीन साल पूरे हो चुके हैं। इसी हमले के बाद शुरू हुआ इस्राइल-हमास संघर्ष कई चरणों से गुजर चुका है। गाजा में बड़े पैमाने पर तबाही हुई, लाखों लोग विस्थापित हुए और हजारों लोगों की जान गई। वहीं, इस्राइल को भी युद्ध की भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है।

तीन साल के दौरान संघर्ष का दायरा गाजा से आगे बढ़कर पश्चिम एशिया के कई हिस्सों तक पहुंच गया। ऐसे में सवाल है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए इस युद्ध ने क्षेत्र की तस्वीर कितनी बदल दी है और फिलहाल गाजा में हालात क्या हैं?

7 अक्टूबर 2023 को क्या हुआ था?

7 अक्टूबर 2023 की सुबह यहूदी धर्म के प्रमुख त्योहार सिम्हत तोराह के दिन गाजा पट्टी से इस्राइल पर अचानक बड़ा हमला हुआ। हमास और अन्य सशस्त्र समूहों ने बड़ी संख्या में रॉकेट दागे। इसके बाद हमलावरों ने सुरक्षा अवरोध को कई जगहों से पार कर जमीन, समुद्र और हवा के रास्ते दक्षिणी इस्राइल में प्रवेश किया।

हमलावरों ने गाजा सीमा के पास कई कस्बों, किबुत्ज और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। नोवा म्यूजिक फेस्टिवल में मौजूद लोग भी हमले की चपेट में आए। इस्राइली अधिकारियों के अनुसार, हमले में 1,200 से अधिक लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया।

इसके बाद इस्राइल ने क्या किया?

हमले के कुछ ही घंटों बाद इस्राइल ने युद्ध की घोषणा कर दी और गाजा पर हवाई हमले शुरू कर दिए। अक्तूबर 2023 में इस्राइल ने गाजा की नाकाबंदी भी कड़ी कर दी। 13 अक्तूबर को उत्तरी गाजा और गाजा सिटी के लोगों को दक्षिण की ओर जाने का आदेश दिया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर छोड़ दिए।

27 अक्तूबर को इस्राइल ने गाजा में बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया। अभियान की शुरुआत उत्तरी गाजा से हुई और बाद में यह दक्षिणी हिस्सों तक पहुंचा। इस्राइल ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करना और बंधकों को वापस लाना है।

हमास के कई बड़े नेता मारे गए

युद्ध के दौरान हमास के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को भी निशाना बनाया गया। जनवरी 2024 में वरिष्ठ नेता सालेह अल-अरूरी मारे गए। मार्च 2024 में हमास के डिप्टी मिलिट्री कमांडर मारवान ईसा की मौत की जानकारी इस्राइल ने दी।

जुलाई 2024 में इस्राइल ने सैन्य शाखा के प्रमुख मोहम्मद दाइफ को मारने का दावा किया, जिसकी बाद में पुष्टि हुई। इसी महीने हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानिया तेहरान में मारे गए।

17 अक्तूबर 2024 को इस्राइल ने हमास नेता याह्या सिनवार की मौत की पुष्टि की। सिनवार को 7 अक्टूबर के हमले की योजना से जुड़े प्रमुख लोगों में माना जाता था।

युद्ध के बीच कई बार हुआ युद्धविराम

युद्ध के दौरान बंधकों की रिहाई और लड़ाई रोकने के लिए कई दौर की बातचीत हुई। नवंबर 2023 में पहला बड़ा युद्धविराम हुआ। 24 नवंबर से शुरू हुए इस समझौते के तहत बंधकों और फलस्तीनी कैदियों की अदला-बदली हुई और मानवीय सहायता गाजा पहुंचाई गई। करीब एक सप्ताह बाद फिर लड़ाई शुरू हो गई।

19 जनवरी 2025 को करीब 15 महीने की लड़ाई के बाद एक और युद्धविराम लागू हुआ। हालांकि 2 मार्च को गाजा में मानवीय सहायता रोक दी गई और 18 मार्च को इस्राइल ने फिर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए।

इसके बाद 10 अक्तूबर 2025 को अमेरिका की मध्यस्थता से एक और युद्धविराम लागू हुआ। पहले चरण में बंधकों और फलस्तीनी कैदियों की रिहाई तथा मानवीय सहायता बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए। हालांकि हमास के निरस्त्रीकरण, इस्राइली सैनिकों की पूरी वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर आगे की सहमति नहीं बन सकी।

तीन साल में कितनी जानें गईं?

संघर्ष के दौरान करीब 1,671 इस्राइली और विदेशी नागरिकों की मौत हुई। वहीं, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ के अप्रैल 2026 के त्वरित क्षति और जरूरत आकलन के मुताबिक, दो साल से अधिक समय से चल रहे संघर्ष में 71,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए और 1,71,000 से अधिक घायल हुए।

युद्ध का आर्थिक असर कितना पड़ा?

युद्ध ने इस्राइल की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाला। बैंक ऑफ इस्राइल की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से 2026 के बीच युद्ध की कुल राजकोषीय लागत करीब 350 अरब शेकेल यानी 115 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।

वहीं, गाजा की अर्थव्यवस्था 84 फीसदी सिकुड़ चुकी है। अप्रैल 2026 के संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ के आकलन के अनुसार, संघर्ष से 35.2 अरब डॉलर का भौतिक नुकसान और 22.7 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। कुल अनुमानित प्रभाव 57.9 अरब डॉलर रहा।

गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अगले 10 वर्षों में करीब 71.4 अरब डॉलर की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। शुरुआती 18 महीनों के लिए ही 26.3 अरब डॉलर की जरूरत बताई गई है।

गाजा का कितना हिस्सा इस्राइल के सैन्य नियंत्रण में?

अक्तूबर 2025 के युद्धविराम के दौरान गाजा में ‘पीली रेखा’ तय की गई थी। उस समय इस्राइली सैनिक गाजा के करीब 53 फीसदी हिस्से में तैनात थे।

जून 2026 के संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार, गाजा के करीब 64.9 फीसदी हिस्से पर इस्राइल का सीधा या कड़ा सैन्य नियंत्रण था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस्राइल गाजा के करीब दो-तिहाई हिस्से पर सैन्य नियंत्रण रखता है।

संघर्ष के दौरान गाजा में 19 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए। कई लोगों को बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ा। 12 लाख से ज्यादा लोग यानी करीब 60 फीसदी आबादी अपना घर खो चुकी है।

गाजा से आगे भी फैला संघर्ष

इन तीन वर्षों में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई गाजा तक सीमित नहीं रही। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ संघर्ष हुआ। ईरान के साथ मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जून 2025 में 12 दिन की सीधी जंग हुई। 2026 में अमेरिका और इस्राइल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ा।

यमन में हूती विद्रोहियों ने इस्राइल और लाल सागर के जहाजों को निशाना बनाया। इसके जवाब में इस्राइल ने हूती ठिकानों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर हमले किए। सीरिया में भी इस्राइल ने ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

तीन साल बाद तस्वीर

7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष तीन साल में एक लंबे और व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदल चुका है। गाजा में भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान हुआ है, बड़ी आबादी विस्थापित हुई है और पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। दूसरी ओर, इस्राइल को भी बड़े सैन्य और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। संघर्ष का असर अब गाजा और इस्राइल की सीमाओं से आगे पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देता है।

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