विदेशी निवेश को बढ़ावा, भारत ने 10 हजार करोड़ के FDI प्रस्ताव मंजूर किए; चीन का हिस्सा सिर्फ एक करोड़

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 63 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों के जरिए 10,292.67 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश को स्वीकृति मिली। इनमें चीन से आए केवल एक करोड़ रुपये के एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जबकि हांगकांग के 13 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनका कुल मूल्य 610.42 करोड़ रुपये है।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, मूल्य के आधार पर सिंगापुर सबसे बड़ा निवेशक रहा। उसके पांच निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनकी कुल राशि 3,259.88 करोड़ रुपये है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक भारत में आए कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत रही है। इस अवधि में चीन से करीब 2.51 अरब डॉलर (लगभग 16,162 करोड़ रुपये) का निवेश आया, जिससे वह निवेशकों की सूची में 23वें स्थान पर है।
गौरतलब है कि 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद भारत सरकार ने प्रेस नोट-3 लागू करते हुए चीन समेत भारत की सीमाओं से लगे देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी थी। इस नियम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और संकट के समय भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण को रोकना था।





