DGCA पर कार्रवाई की मांग तेज, रिश्तेदारों की नियुक्ति और प्रभाव के इस्तेमाल पर सवाल

भारत सरकार ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में हितों के टकराव (Conflict of Interest) और अधिकारियों के परिजनों की विमानन क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इन मामलों में पारदर्शिता की कमी और संभावित प्रभाव के इस्तेमाल पर डीजीसीए को फटकार लगाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक डीजीसीए के 51 अधिकारियों ने विमानन क्षेत्र में कार्यरत अपने 59 रिश्तेदारों की जानकारी दी है। एक वर्ष पहले यह संख्या 33 अधिकारियों के 41 रिश्तेदारों की थी। ये रिश्तेदार एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एयरबस इंडिया, फ्लाइंग स्कूलों और एयरपोर्ट ऑपरेटरों सहित विभिन्न संस्थानों में कार्यरत हैं।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय का मानना है कि यदि ऐसे मामलों का समय पर खुलासा नहीं किया जाता, तो नियामकीय निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि कुछ अधिकारी अपने परिजनों से जुड़े संस्थानों की निगरानी के दौरान हितों के टकराव की स्थिति में आ सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एक अधिकारी के करीब 12 रिश्तेदार विमानन क्षेत्र में कार्यरत थे, लेकिन इसकी जानकारी उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सामने आई। भारतीय सेवा नियम सरकारी अधिकारियों को अपने पद का उपयोग कर परिवार के सदस्यों के लिए नौकरी या अन्य लाभ सुनिश्चित करने की अनुमति नहीं देते।

बताया गया है कि तत्कालीन डीजीसीए प्रमुख फैज अहमद किदवई ने जुलाई 2025 में हितों के टकराव से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए अधिक प्रशासनिक अधिकार मांगे थे, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। मंत्रालय का कहना था कि ऐसे मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

हालांकि, इस मामले में सामने आई जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट और सरकारी दस्तावेजों के दावों पर आधारित है। डीजीसीए की ओर से इन दावों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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