भारत का सबसे बड़ा तेल-गैस मिशन अंडमान में, ONGC ने बताया भविष्य का प्लान

देश में Uttar Pradesh के बलिया और Bihar के समस्तीपुर में तेल और प्राकृतिक गैस मिलने की चर्चाओं के बीच Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन दावों को तकनीकी रूप से केवल “न्यूज हाइप” बताया है। देहरादून स्थित ONGC मुख्यालय में दैनिक भास्कर से बातचीत में अधिकारी ने कहा कि गंगा बेसिन में अब तक ऐसी कोई खोज नहीं हुई है, जिसे बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाए।

अधिकारी के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर 40 हजार क्यूबिक मीटर गैस फ्लो को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है, जबकि ONGC का रोजाना उत्पादन करीब 6 से 6.5 करोड़ क्यूबिक मीटर है। ऐसे में यह खोज बेहद छोटी मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि 3000-3500 मीटर की ड्रिलिंग को भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि ONGC गुजरात, राजामुंद्री और कश्मीर में 6000 मीटर तक ड्रिलिंग कर चुकी है।

ONGC अधिकारी ने बताया कि असली फोकस अब Andaman and Nicobar Islands के गहरे समुद्री क्षेत्र पर है, जहां भारत सरकार की निगरानी में देश का सबसे बड़ा तेल और गैस एक्सप्लोरेशन मिशन चलाया जा रहा है। यहां एक कुएं की ड्रिलिंग पर 1100 से 1200 करोड़ रुपए तक खर्च हो रहे हैं और ड्रिलिंग रिग का प्रतिदिन किराया करीब 5 करोड़ रुपए है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के मुताबिक, अंडमान के पूर्वी तट के पास ‘श्री विजयपुरम-2’ कुएं में प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि हुई है। यहां 295 मीटर गहरे समुद्र और 2650 मीटर की टारगेट गहराई पर ड्रिलिंग की गई थी। जांच में गैस में 87% मीथेन पाई गई है।

अधिकारी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा कच्चा तेल और करीब 60% प्राकृतिक गैस आयात करता है। इसी वजह से सरकार घरेलू ऊर्जा खोज पर बड़ा दांव लगा रही है। हालांकि तेल और गैस की खोज बेहद जोखिम भरा काम है, जिसमें हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद सफलता की गारंटी नहीं होती।

उन्होंने बताया कि ONGC विदेशों में भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस, ईरान, सूडान, सीरिया और मोजाम्बिक जैसे देशों में युद्ध, प्रतिबंध और अस्थिरता के कारण भारत को निवेश का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा। वहीं घरेलू उत्पादन में बॉम्बे हाई अब भी देश की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है।

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