काम का झांसा देकर बनाया बंधक: भूख-प्यास से बेहाल 53 आदिवासियों को पुलिस ने छुड़ाया

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी समुदाय के 53 लोगों को महाराष्ट्र में बंधक बनाकर गन्ने के खेतों में काम करवाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ितों को 500 रुपए रोज की दिहाड़ी और फ्री रहने-खाने का लालच देकर घर से ले जाया गया, लेकिन महाराष्ट्र पहुंचते ही उन्हें अलग-अलग जमींदारों के हवाले कर दिया गया।

आरोप है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था। समय पर खाना नहीं दिया जाता और मजदूरी मांगने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। कई मजदूरों ने बताया कि सुबह 4 बजे से देर रात तक खेतों में काम करवाया जाता था। इलाज की जगह जबरन शराब पिलाने तक के आरोप सामने आए हैं।

शुक्रवार देर रात प्रतापगढ़ पुलिस ने करीब 950 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से 13 महिलाओं समेत 53 मजदूरों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित प्रतापगढ़ पहुंचाया।

प्रतापगढ़ एसपी बी. आदित्य ने बताया कि 22 दिसंबर को घंटाली थाना क्षेत्र में एक मजदूर के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सोलापुर जिले के अकलूज थाना क्षेत्र के जाबुड़ गांव में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद पुलिस टीम गठित कर कार्रवाई की गई।

पीड़ित मजदूरों ने बताया कि अत्याचार से परेशान होकर कुछ लोग किसी तरह वहां से भाग निकले और प्रतापगढ़ पहुंचकर परिजनों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस जांच में सामने आया है कि अलवर और महाराष्ट्र के दलालों ने मजदूरों को इंदौर में काम दिलाने का झांसा दिया था, लेकिन उन्हें महाराष्ट्र ले जाया गया। आरोप है कि दलालों ने जमींदारों से करीब 27.50 लाख रुपए एडवांस भी ले रखे थे।

फिलहाल पुलिस ने महाराष्ट्र के सीताराम पाटिल और अलवर निवासी खान नामक दलाल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रेस्क्यू किए गए मजदूरों को उनके गांव भेज दिया गया है।

Related Articles

Back to top button