वोटिंग से पहले पहचान अनिवार्य: घूंघट-बुर्का में महिला मतदाताओं का सत्यापन महिला कर्मचारी करेंगी

प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत पर्दा, बुर्का या घूंघट पहने महिला मतदाताओं को पहचान सत्यापन के बाद ही वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि यह कोई नया आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि वोटर की पहचान से जुड़े नियम पहले से लागू हैं और इन्हें ही दोबारा जारी किया गया है। पंचायतीराज, स्थानीय निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाता की पहचान की प्रक्रिया एक जैसी रहती है। मतदान से पहले फोटो युक्त मतदाता पहचान पत्र या मान्य आईडी से पहचान की जाती है।
महिला कर्मचारियों की ली जाएगी मदद
आयोग के अनुसार, कई क्षेत्रों में परंपराओं के कारण महिलाएं घूंघट या पर्दा हटाकर पुरुष कर्मचारियों के सामने चेहरा दिखाने में आपत्ति करती हैं, जिससे विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों से बचने के लिए स्थानीय महिला कर्मचारियों की मदद से पहचान कराई जाएगी।
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निकाय और पंचायत चुनावों की पोलिंग पार्टी में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। ऐसे में पर्दा या बुर्का पहने महिला मतदाताओं की पहचान के लिए ग्राम सेवक, पटवारी, महिला शिक्षक या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जैसी स्थानीय महिला कर्मचारियों की सहायता ली जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी पोलिंग अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पहचान प्रक्रिया के दौरान महिला मतदाताओं की गरिमा और निजता का पूरा ध्यान रखा जाए और मतदान शांतिपूर्ण व निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया जाए।





