सीआरपीएफ जवान कर्मवीर यादव पंचतत्व में विलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा सैलाब

कोटपूतली-बहरोड़ के गांव गंडाला निवासी सीआरपीएफ जवान कर्मवीर यादव का पार्थिव देह शुक्रवार को पैतृक गांव पहुंचा। मणिपुर के इम्फाल में 9 दिसंबर को ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था। जैसे ही पार्थिव देह गांव पहुंचा, पत्नी उषा देवी फफककर रो पड़ीं और शोक में अपनी चूड़ियां तोड़ दीं। वहीं बेटा निवेश अपने पिता को आखिरी बार देख बिलख उठा, जिसे परिजनों ने संभाला।
तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
जवान को अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों युवा तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। यह यात्रा नीमराना के बाबा खेतानानाथ मंदिर बाइपास मोड से शुरू होकर गंडाला गांव तक पहुंची। रास्ते भर “कर्मवीर अमर रहें” के नारे गूंजते रहे।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
गंडाला के श्मशान घाट पर हवलदार कर्मवीर यादव का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सीआरपीएफ अधिकारियों ने पार्थिव देह पर लिपटे राष्ट्रीय ध्वज को उनके पिता और बेटे को सौंपा। इसके बाद जवानों की टुकड़ी ने तीन राउंड हवाई फायर कर वीर सपूत को सलामी दी।
परिवार का दर्द—Promoted Same Day, Gone Too Soon
कर्मवीर यादव 2007 में CRPF में ड्राइवर के पद पर भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग मणिपुर के इम्फाल रांगोली में थी। निधन वाले ही दिन उनका कांस्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल पद पर प्रमोशन हुआ था।
CRPF के अधिकारी सुरेश कुमार के अनुसार, 9 दिसंबर की रात ड्यूटी से लौटकर खाना खाने के बाद कर्मवीर आराम के लिए गए थे। रात करीब 10 बजे साथी जवानों ने आवाज दी, लेकिन वे बेहोश मिले। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
छुट्टी से लौटे थे दो दिन पहले ही
भाई नरवीर ने बताया कि कर्मवीर 20 नवंबर को छुट्टी पर घर आए थे। उन्हें 5 दिसंबर को वापस जाना था, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने पर वे 8 दिसंबर को ड्यूटी पर पहुंचे। प्रमोशन मिलने की खुशी उन्होंने पत्नी, बेटे और माता-पिता के साथ साझा भी की थी—लेकिन कुछ ही घंटों बाद परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
गांव में मातम का माहौल है और लोग वीर जवान को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।





