महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता: मौद्रिक नीति समिति ने बदली रेपो दर, आम आदमी पर क्या होगा असर?

देश में महंगाई का दायरा बढ़ने और कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव तेज होने के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सर्वसम्मति से समर्थन किया। बुधवार को जारी बैठक के ब्योरे में यह जानकारी सामने आई। करीब चार साल बाद पहली बार प्रमुख नीतिगत दर में बदलाव किया गया है।

आरबीआई ने सात अक्टूबर को समाप्त हुई तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था। गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने इस फैसले के पक्ष में मतदान किया।

महंगाई का बढ़ता दायरा बना दर बढ़ाने की वजह

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मौद्रिक नीति के रुख को बदलते हुए धीरे-धीरे सख्ती की दिशा में बढ़ना उचित है। उन्होंने संकेत दिया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

मल्होत्रा के मुताबिक, आगे रेपो दर में और बढ़ोतरी की जाएगी या इसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जाएगा, इसका फैसला महंगाई और आर्थिक वृद्धि की वास्तविक स्थिति के साथ-साथ भविष्य के अनुमानों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

अगस्त में 37% वस्तुओं की महंगाई दर चार फीसदी से ऊपर

बैठक के ब्योरे के अनुसार, गवर्नर ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में शामिल वस्तुओं की महंगाई दर में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि अगस्त में सूचकांक में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर चार प्रतिशत से अधिक थी। मार्च में यह अनुपात केवल 20 प्रतिशत था।

आरबीआई के मुताबिक, आगे नीतिगत फैसलों में अंतर्निहित महंगाई, कीमतों के दबाव का अलग-अलग वस्तुओं तक फैलना, आपूर्ति में बाधा के दूसरे दौर के प्रभाव और मांग में होने वाले बदलाव जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।

बाहरी आपूर्ति संबंधी झटकों से बढ़ रही महंगाई: पूनम गुप्ता

मौद्रिक नीति समिति की सदस्य और आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि मौजूदा महंगाई के पीछे मुख्य रूप से बाहरी आपूर्ति संबंधी झटके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी ऐसे बहुत कम संकेत हैं, जिनसे लगे कि महंगाई लंबे समय तक बनी रहेगी या लोगों की महंगाई संबंधी उम्मीदों पर इसका असर पड़ेगा।

गुप्ता के अनुसार, महामारी के बाद महंगाई को निर्धारित दायरे में रखने वाली व्यवस्था के तहत आरबीआई ने जरूरत के मुताबिक नीतिगत कदम उठाए। इससे मौद्रिक नीति के ढांचे की विश्वसनीयता बनी रही और महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदें निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप रहीं।

आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन पर जोर

पूनम गुप्ता ने कहा कि महंगाई के बढ़ते दबाव और आर्थिक वृद्धि की मजबूती को देखते हुए रेपो दर बढ़ाने के फैसले को और टालना उचित नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का समर्थन किया।

आरबीआई के सामने अब महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है। आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर फैसले महंगाई के रुझान, आपूर्ति संबंधी परिस्थितियों और आर्थिक वृद्धि के अनुमानों पर निर्भर करेंगे।

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