पश्चिमी यूपी में सियासी बिसात बिछाने आ रहे सीएम योगी, निशाने पर होगा 2027

यूपी में विधानसभा चुनाव भले ही दूर हैं, लेकिन इसको लेकर अभी से सत्ता पक्ष-विपक्ष सियासी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। सपा पीडीए समीकरणों के सहारे सत्ता में वापसी की कोशिशों में जुटी है तो भाजपा अभी से अपने कील-कांटे दुरुस्त कर 2027 में एक बार फिर सत्ता में वापसी की योजना पर काम कर रही है। भाजपा की चुनावी लड़ाई की कमान एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में ही दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को एक बार फिर पश्चिमी यूपी पहुंच रहे हैं जहां वे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुण्यतिथि के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। लेकिन पिछले 15 दिनों में लगातार दूसरी बार पश्चिमी यूपी की यात्रा को 2027 की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी यूपी भाजपा की कमजोर कड़ी साबित हुआ था। 2014 से लेकर 2022 तक इस इलाके में भाजपा ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन संविधान मुद्दे की आंधी में 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के हाथ से फिसल गया। योगी जानते हैं कि यदि भाजपा को तीसरी बार यूपी की सत्ता में लाना है तो उन्हें पूर्वांचल के साथ-साथ पश्चिम के इस किले पर दुबारा कब्जा करना होगा। उनके हाल के दौरों को उनकी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है भाजपा की रणनीति
पश्चिमी यूपी में किसान, रोजगार और विकास का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। यूपी सरकार इन सभी मुद्दों पर एक साथ काम करती हुई दिखाई दे रही है। केंद्र और यूपी सरकार ने किसानों को केंद्रित कर कई नीतियां तैयार की हैं जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। पश्चिमी यूपी के जाट-गुर्जर और अन्य समुदाय के युवा सेना और पुलिस की नौकरी को प्राथमिकता देते हैं। यूपी सरकार ने अग्निवीर युवाओं को नौकरी में विशेष वरीयता देने की घो।षणा कर युवाओं को साधने की कोशिश की है।
इसी तरह पश्चिमी यूपी में एयरपोर्ट बनाने से लेकर इसे बैंगलोर-हैदराबाद जैसे शहरों की तरह तकनीकी और उत्पादन का बड़ा हब बनाने की कोशिशें जारी हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के विकास ने यूपी में बेरोजगारी की दर को रिकॉर्ड निचले स्तर पर लाने में सहायता की है। इससे पूरे प्रदेश के विकास को नई ऊंचाई देने में मदद मिली है।





