51 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन को मिली मजबूती, अपाचे बेड़े में जुड़े 3 हेलिकॉप्टर

भारतीय सेना को अमेरिका से आखिरी तीन अपाचे AH-64E अटैक हेलिकॉप्टर मिल गए हैं। ये हेलिकॉप्टर एंटोनोव AN-124 ट्रांसपोर्ट विमान के जरिए आज गाजियाबाद जिले के हिंडन एयरबेस पर पहुंचे। इसके साथ ही सेना के अपाचे हेलिकॉप्टरों का 6 यूनिट वाला बेड़ा पूरा हो गया है।
सेना के अनुसार, असेंबली, संयुक्त निरीक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आने वाले दिनों में इन तीनों हेलिकॉप्टरों को पाकिस्तान सीमा के पास जोधपुर स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात किया जाएगा। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों को ध्यान में रखते हुए इन हेलिकॉप्टरों का रंग मिट्टी जैसा रखा गया है, जिससे वे desert terrain में आसानी से छुप सकें।
रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2020 में बोइंग कंपनी से भारतीय थल सेना के लिए 6 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने का करीब 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5,691 करोड़ रुपये) का करार किया था। हालांकि सप्लाई चेन और तकनीकी कारणों से डिलीवरी में करीब 15 महीने की देरी हुई। पहली खेप जुलाई 2025 में भारत पहुंची थी, जबकि आखिरी तीन हेलिकॉप्टर नवंबर में आने थे, लेकिन तुर्की द्वारा ओवरफ्लाइट की अनुमति न मिलने के कारण विमान को वापस लौटना पड़ा था।
भारतीय सेना ने मार्च 2024 में जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का गठन किया था। इसके लिए अमेरिका में 50 पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग पहले ही पूरी हो चुकी है। इन अपाचे हेलिकॉप्टरों ने इस वर्ष ‘एक्सरसाइज मरू ज्वाला’ के दौरान अपना ऑपरेशनल डेब्यू भी किया था।
AH-64E अपाचे को दुनिया के सबसे एडवांस अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। यह हेलफायर मिसाइल, 70 मिमी रॉकेट और 30 मिमी चेन गन से लैस है। इसमें लगे लॉन्गबो रडार की मदद से यह एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और नाइट विजन सिस्टम के जरिए अंधेरे में भी दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।
जोधपुर में इन हेलिकॉप्टरों की तैनाती का रणनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है। पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर लगातार बनी सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपाचे हेलिकॉप्टर भारतीय सेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता को और मजबूत करेंगे।





