संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने रविवार रात से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि महिला पत्रकारों की शिकायत पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पत्रकारों को अपना काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सोमवार सुबह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया
प्रदर्शनकारी रातभर थाने के बाहर मौजूद रहे। सोमवार सुबह पुलिस ने उन्हें वहां से हटाना शुरू किया और कई लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, इलाके में पहले से BNSS की धारा 163 लागू थी और प्रदर्शनकारियों को स्थान खाली करने की चेतावनी दी गई थी। आदेश का पालन नहीं करने पर पुलिस ने कार्रवाई की।
तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप
3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर SIR के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि उन्होंने ACP विवेक भगत से महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया, जिसके बाद उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, महिला पत्रकारों की शिकायतें दर्ज कर ली गई हैं और उनकी मेडिकल जांच भी कराई गई है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
आप और अन्य संगठनों ने भी किया प्रदर्शन
महिला पत्रकारों की शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी रविवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि आम लोगों की शिकायत पर पुलिस एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत होने पर कार्रवाई में देरी की जा रही है।
वहीं, CJP की ओर से भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। संगठन के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता एवं डीसीपी नेहा यादव के अनुसार, 3 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान BNSS की धारा 163 के तहत प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने की चेतावनी दी गई थी। आदेश नहीं मानने पर कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, हिरासत के दौरान कथित बदसलूकी को लेकर तीन महिलाओं ने शिकायत दी थी। शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस ने कहा है कि संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध वीडियो फुटेज की भी जांच की जाएगी।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल एक अन्य वीडियो को लेकर भी स्पष्ट किया है कि वह दिल्ली का नहीं है और उसमें दिल्ली पुलिस के जवान शामिल नहीं हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या दावे को सत्यापित किए बिना सोशल मीडिया पर साझा न करें।





