हरीश रावत का बड़ा बयान: बोले- भाजपा के लगाए कलंक से मुक्त होना चाहता हूं

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने राजनीतिक भविष्य, विरासत और चुनाव से पहले उन पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर खुलकर बात की। अमर उजाला के डिजिटल कार्यक्रम ‘शतरंज’ में उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की बात कही थी, लेकिन अब वह फिर सक्रिय हैं। रावत ने हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई है।
पीएस से जुड़े मामले पर क्या बोले रावत?
अपने तत्कालीन निजी सचिव (PS) से जुड़े घटनाक्रम पर हरीश रावत ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके तत्कालीन पीएस के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया और इसके जरिए उन्हें भी मामले से जोड़ने की कोशिश हुई।
रावत ने कहा कि उनके पीएस अपने मामले की कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे, लेकिन इस मामले में उन्हें घसीटने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक तरीके से अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।
‘भाजपा के लगाए कलंक से मुक्त होना चाहता हूं’
हरीश रावत ने कहा कि उनकी करीब छह दशक लंबी राजनीतिक यात्रा में यह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके राजनीतिक जीवन पर कोई ऐसा आरोप रह जाए कि उनके कार्यकाल में नौकरियां बिकी थीं।
उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक लोगों को नियुक्तियां दी गईं। रावत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और भर्ती बोर्ड बनाए गए थे तथा अधिकारियों को किसी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।
‘कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकता’
पार्टी छोड़ने की किसी संभावना से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा कि वह कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि करीब 60 साल पहले उन्होंने कांग्रेस का झंडा थामा था और उनकी इच्छा है कि आगे भी इसी झंडे के साथ राजनीतिक जीवन जारी रखें।
‘मेरे साथ मेरा विवेक और उत्तराखंड के लोग हैं’
यह पूछे जाने पर कि क्या इस राजनीतिक लड़ाई में वह खुद को अकेला महसूस करते हैं, रावत ने कहा कि उनके साथ उनका विवेक, ईमान, उनकी मां और उत्तराखंड के लोग हैं।
उन्होंने अपनी सेहत का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टर ने उन्हें छह सीढ़ियों से ज्यादा चढ़ने की सलाह नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद वह सक्रिय हैं। रावत ने कहा कि उनके लिए महत्वपूर्ण यह है कि उन पर लगाए गए कथित कलंक से वह मुक्त हो जाएं।
उत्तराखंड की राजनीति में फिर सक्रिय रावत
हरीश रावत के इन बयानों के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उनकी आगामी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि वह चुनावी राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं और आगे भी पार्टी तथा उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे।





