भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पड़ी धीमी, अक्तूबर में उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि घटी

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि रफ्तार अक्तूबर में कुछ धीमी पड़ गई। उत्पादन और नए ऑर्डर में सितंबर के मुकाबले कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, क्षेत्र में गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी रहीं और निर्यात ऑर्डर में अच्छी मजबूती देखने को मिली। वहीं, कारखानों में लगातार दूसरे महीने रोजगार बढ़ा, जबकि लागत का दबाव फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
सोमवार को जारी एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के मुताबिक, अक्तूबर में सूचकांक घटकर 54.7 पर आ गया, जबकि सितंबर में यह 55.1 था। हालांकि, पीएमआई का 50 से ऊपर रहना विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है।
उत्पादन और नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी
सर्वेक्षण के अनुसार, अक्तूबर में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डर बढ़े, लेकिन इनकी वृद्धि की गति पिछले महीने की तुलना में कम रही। इसके बावजूद नए कारोबार में विस्तार मजबूत बना रहा। मांग में लगातार सुधार से कंपनियों को नए ऑर्डर मिलते रहे।
पीएमआई का आंकड़ा अपने दीर्घकालिक औसत से भी ऊपर बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां जारी हैं।
निर्यात ऑर्डर छह महीने के उच्च स्तर पर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत मांग के कारण भारतीय कंपनियों के नए निर्यात ऑर्डर में बढ़ोतरी हुई। सर्वेक्षण के मुताबिक, अक्तूबर में निर्यात ऑर्डर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए।
एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले ऑर्डर ने विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों को समर्थन दिया। कंपनियों को बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, नेपाल, ओमान, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों से नए ऑर्डर मिले।
लगातार दूसरे महीने बढ़ा रोजगार
विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन की जरूरतों और काम के बढ़ते बोझ के कारण कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई। अक्तूबर में कारखानों में रोजगार लगातार दूसरे महीने बढ़ा। हालांकि, नई भर्तियों की रफ्तार सितंबर के मुकाबले धीमी रही।
इस बीच, कंपनियों ने कच्चे माल का भंडार भी बढ़ाया। सर्वेक्षण के मुताबिक, उत्पादकों ने पिछले आठ महीनों में सबसे अधिक मात्रा में कच्चा माल जमा किया। कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों में अनिश्चितता और उत्पादन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एहतियाती भंडार तैयार किया।
कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा कमजोर
मांग में सुधार और नए ऑर्डर मिलने के बावजूद कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा कमजोर हुआ। अक्तूबर में कारोबारी आशावाद सितंबर की तुलना में नीचे रहा और दीर्घकालिक औसत से भी कम दर्ज किया गया।
सर्वेक्षण में शामिल करीब 18 प्रतिशत विनिर्माण कंपनियों ने अगले एक साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई। वहीं, बाकी कंपनियों ने इस संबंध में तटस्थ रुख अपनाया।
लागत का दबाव फरवरी के बाद सबसे कम
विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों के लिए लागत के मोर्चे पर राहत देखने को मिली। सर्वेक्षण में शामिल तीनों प्रमुख विनिर्माण श्रेणियों में लागत का दबाव कम हुआ।
कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत में महंगाई की दर फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे कंपनियों को लागत संबंधी दबाव से कुछ राहत मिली।
एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई एसएंडपी ग्लोबल तैयार करता है। इसके लिए करीब 400 विनिर्माण कंपनियों के खरीद प्रबंधकों से प्रश्नावली के जरिए जानकारी जुटाई जाती है।
अक्तूबर में कोयला उत्पादन 42 प्रतिशत बढ़ा
इस बीच, देश में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा। सरकार के मुताबिक, अक्तूबर में इन खदानों से 2.203 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ, जबकि अक्तूबर 2025 में यह 1.549 करोड़ टन था। इस तरह सालाना आधार पर उत्पादन में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अक्तूबर में कोयले की आपूर्ति 2.111 करोड़ टन रही, जो पिछले साल इसी महीने के 1.548 करोड़ टन से 36 प्रतिशत अधिक है।
अप्रैल से अक्तूबर तक भी उत्पादन और आपूर्ति में बढ़ोतरी
कोयला मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्तूबर के दौरान कोयला उत्पादन बढ़कर 11.723 करोड़ टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 10.533 करोड़ टन था। इस तरह उत्पादन में 11.30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इसी अवधि में कोयले की आपूर्ति 11.195 करोड़ टन से बढ़कर 12.486 करोड़ टन हो गई, जो 11.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है।
कुल मिलाकर, अक्तूबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि रफ्तार में थोड़ी कमी आई, लेकिन निर्यात ऑर्डर और रोजगार में बढ़ोतरी से सकारात्मक संकेत भी मिले। वहीं, कोयला उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़े खनन क्षेत्र में मजबूत गतिविधियों को दर्शाते हैं।





