राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच: सुभाष से जुड़ा बैंक रिकॉर्ड खंगाल रही टीम, सामने आई अहम जिम्मेदारी

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच अब गणना कक्ष में हुई कथित गड़बड़ी से आगे बढ़कर बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन तक पहुंच गई है। जांच में एसबीआई के जमा रजिस्टर, संबंधित लोगों के बैंक खातों में हुई नकद जमा, संपत्ति खरीद और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की गई है।

विवेचना में सामने आया है कि मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि की गणना के बाद उसे बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी समय के साथ अलग-अलग लोगों के पास रही। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, 7 सितंबर 2020 से 6 जनवरी 2022 तक बैंक में जमा कराई गई राशि के रजिस्टर पर रामशंकर यादव के हस्ताक्षर मिले हैं।

इसके बाद 7 जनवरी 2022 से दान राशि की गणना कराने और उसे एसबीआई की नया घाट शाखा में जमा कराने की जिम्मेदारी सुभाष श्रीवास्तव को दी गई। बैंक के जमा रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर भी मिले हैं। जांच में बैंक रिकॉर्ड को इस पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ी माना गया है।

गणना प्रक्रिया के दौरान हुई पहचान

जांच के मुताबिक, दान राशि की गणना और उसे बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया की निगरानी के दौरान रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव की पहचान हुई थी। बाद में वर्ष 2025 में अनुकल्प मिश्रा के माध्यम से लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और अविनाश शुक्ला को गणनाकर्मी के तौर पर नियुक्त किए जाने की बात जांच में सामने आई।

जांच एजेंसी के अनुसार, पहले से कार्यरत रमाशंकर मिश्रा के साथ मिलकर इन लोगों पर गणना कक्ष में रखी दान राशि में कथित गड़बड़ी करने के आरोप हैं। इसके बाद मनीष कुमार यादव को भी गणनाकर्मी के तौर पर शामिल किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।

सीसीटीवी के साथ वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा

मामले की विवेचना में सिर्फ सीसीटीवी फुटेज को आधार नहीं बनाया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, डिजिटल और मोबाइल साक्ष्य के साथ बैंक खातों में हुई नकद जमा, चल-अचल संपत्तियों की खरीद और दूसरे वित्तीय लेनदेन को भी साक्ष्य के तौर पर संकलित किया गया है।

जांच में यह भी देखा गया कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनकी आर्थिक गतिविधियों में रकम का कोई ऐसा प्रवाह मिला या नहीं, जिसे गणना कक्ष से कथित तौर पर हटाई गई धनराशि से जोड़ा जा सके। हालांकि, किसी बैंक खाते में नकद राशि जमा होना या संपत्ति खरीदा जाना अपने आप में चोरी की रकम होने का प्रमाण नहीं है। किसी लेनदेन को मामले से जोड़ने के लिए उसके स्रोत, समय और अन्य साक्ष्यों के बीच संबंध स्थापित करना जरूरी होगा।

दानपात्र से बैंक तक तय थी प्रक्रिया

मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की राशि की गणना और छंटाई के बाद उसे अधिकृत बैंक कर्मचारियों को सौंपकर बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया निर्धारित थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपों से जुड़े लोगों की राशि तक पहुंच किसी बाहरी व्यक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि गणना और छंटाई की प्रक्रिया में उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों के कारण थी।

विवेचना में इसी जिम्मेदारी और राशि पर नियंत्रण के कथित दुरुपयोग को आपराधिक न्यास भंग से जुड़ी कड़ी के तौर पर देखा गया है। मामले में जांचकर्ताओं ने गणना कक्ष से लेकर बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन तक कई स्तरों पर साक्ष्य जुटाए हैं।

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