यूक्रेन के हमलों से रूस की तेल सप्लाई पर दबाव, भारत ने 2025 के कुल आयात को छोड़ा पीछे

यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों से रूस की घरेलू तेल रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बीच भारत से रूस के ईंधन आयात में बड़ा उछाल आया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अगस्त में 1.72 लाख टन तेल उत्पादों का आयात किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है।

भारत से 1.20 लाख टन पेट्रोल मंगाया

रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में रूस ने भारत से लगभग 1.20 लाख टन पेट्रोल आयात किया, जिसकी कीमत करीब 7.8 करोड़ यूरो आंकी गई है।

अगस्त का रूसी ईंधन आयात पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना से अधिक रहा और पूरे 2025 में किए गए कुल आयात का करीब तीन गुना था।

रूसी कच्चे तेल से भारत में तैयार हुआ पेट्रोल

CREA के मुताबिक, रूस को भेजा गया पूरा पेट्रोल वाडिनार रिफाइनरी से लोड किया गया था। इस रिफाइनरी का नियंत्रण नायरा एनर्जी के पास है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में वाडिनार रिफाइनरी ने अपनी जरूरत का पूरा कच्चा तेल रूस से खरीदा। इस तरह रूस अपनी हिस्सेदारी वाली भारतीय रिफाइनरी से अपने कच्चे तेल को ईंधन में बदलवाकर उसे वापस रूस मंगा रहा है।

यूक्रेनी हमलों से घरेलू ईंधन उत्पादन प्रभावित

रूस के पेट्रोल आयात में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन लगातार रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को ड्रोन हमलों से निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों से रूस का घरेलू ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ और कुछ इलाकों में पेट्रोल की कमी की स्थिति बनी।

अगस्त में रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में पेट्रोल की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत रही, जबकि 2023 से 2025 के बीच यह औसतन सिर्फ 6 प्रतिशत थी।

मिस्र के तट के पास बदले गए पेट्रोल के कार्गो

CREA के अनुसार, वाडिनार से रूस भेजे गए पेट्रोल के प्रत्येक कार्गो को मिस्र के तट के पास जहाज से जहाज में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद इसे रूस के आर्कटिक बंदरगाह बेलोये मोरे में उतारा गया।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कारोबार में शामिल सभी जहाज प्रतिबंधों के दायरे में थे और छह में से चार जहाज पहले कथित तौर पर गलत झंडे के तहत संचालन कर चुके थे।

रूस के तेल उत्पाद निर्यात में 21 प्रतिशत गिरावट

जहां भारत से रूस का ईंधन आयात बढ़ा, वहीं अगस्त में रूस के समुद्री मार्ग से तेल उत्पादों के निर्यात में 21 प्रतिशत की गिरावट आई। गंतव्य बंदरगाहों पर उतारे गए तेल उत्पादों से होने वाला राजस्व जुलाई की तुलना में 32 प्रतिशत घटकर प्रतिदिन 7.8 करोड़ यूरो रह गया।

रूस के चौथे सबसे बड़े तेल उत्पाद निर्यात बंदरगाह तुप्से पर लगातार तीसरे महीने कोई तेल उत्पाद कार्गो लोड नहीं हो सका। मई से यहां यूक्रेनी ड्रोन हमलों का असर देखने को मिला है।

भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार

अगस्त में भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा। भारत ने इस दौरान रूस से कुल 4.8 अरब यूरो मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 4.1 अरब यूरो, यानी कुल खरीद का 87 प्रतिशत रही।

हालांकि, जुलाई की तुलना में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 24 प्रतिशत घटा। इसके बावजूद भारत रूस से ऊर्जा खरीद के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा।

चीन सबसे बड़ा खरीदार

अगस्त में चीन रूस का सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा। रूस के पांच सबसे बड़े खरीदारों से होने वाले राजस्व में चीन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत यानी करीब 8.4 अरब यूरो रही।

वहीं, अगस्त में रूस के कच्चे तेल की औसत कीमत 23 प्रतिशत बढ़कर 69.90 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह जी-7 और यूरोपीय संघ की ओर से तय 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी अधिक थी।

Related Articles

Back to top button