केंद्रीय कर्मियों के लिए खुशखबरी: 3% बढ़ेगा DA/DR, लाखों कर्मचारियों-पेंशनरों की बढ़ेगी सैलरी-पेंशन

केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में तीन फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर इससे लाभान्वित हो सकते हैं। बढ़ोतरी होने पर DA/DR की मौजूदा 60 फीसदी दर बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगी।

3 फीसदी बढ़ सकता है DA/DR

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसका लाभ एक जुलाई से प्रभावी माना जा सकता है।

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को 60 फीसदी की दर से DA/DR मिल रहा है। तीन फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यह दर 63 फीसदी हो जाएगी।

महंगाई के आंकड़ों से बढ़ोतरी की उम्मीद

DA/DR में बढ़ोतरी के लिए महंगाई के आंकड़ों को अहम आधार माना जाता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई। दिसंबर 2025 में यह 148.2 पर रहा।

वहीं, जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच भी सूचकांक में बढ़ोतरी देखी गई। जनवरी में यह 148.6 था, जो जुलाई में बढ़कर 153.2 हो गया।

पिछले साल भी हुई थी तीन फीसदी बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष एक जुलाई से कर्मचारियों और पेंशनरों के DA/DR में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद DA/DR की दर 58 फीसदी हो गई थी। इसके बाद एक जनवरी 2026 से दो फीसदी की बढ़ोतरी के साथ यह दर बढ़कर 60 फीसदी हुई।

DA बढ़कर 63 फीसदी हुआ तो कितना फायदा?

अगर सरकार तीन फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी देती है तो मौजूदा 60 फीसदी DA/DR बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगा। इसका वास्तविक आर्थिक लाभ प्रत्येक कर्मचारी या पेंशनर के मूल वेतन या पेंशन पर निर्भर करेगा।

उदाहरण के तौर पर, किसी कर्मचारी का मूल वेतन 30,000 रुपये है तो 60 फीसदी की दर से उसका DA 18,000 रुपये बनता है। 63 फीसदी होने पर यह 18,900 रुपये हो जाएगा। यानी केवल DA में 900 रुपये मासिक की बढ़ोतरी होगी। यह सिर्फ उदाहरण है; वास्तविक भुगतान संबंधित मूल वेतन और लागू नियमों के आधार पर होगा।

50 फीसदी से ऊपर DA होने पर क्या होगा?

DA/DR की दर 50 फीसदी से ऊपर होने के बाद इसे मूल वेतन और पेंशन में मिलाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। हालांकि, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार DA को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव नहीं रखती।

कर्मचारियों की क्या मांग है?

कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने DA की गणना के तरीके में बदलाव की मांग की है। संगठन का कहना है कि 12 महीने के औसत के बजाय तीन महीने के औसत के आधार पर DA तय किया जाना चाहिए, ताकि महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों को जल्द राहत मिल सके।

इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करने की मांग भी उठाई गई है।

हर तीन महीने में DA देने की मांग

कर्मचारी संगठनों की ओर से DA की गणना और भुगतान छह महीने के बजाय हर तीन महीने में करने की मांग भी की गई है। साथ ही पॉइंट-टू-पॉइंट DA देने की मांग है, ताकि सूचकांक में होने वाली छोटी बढ़ोतरी का लाभ भी कर्मचारियों को मिल सके।

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