Stock Market Update: सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी से निवेशकों को राहत, 22,800 के ऊपर निकला निफ्टी

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा चढ़कर 73,646 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 22,800 के पार कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें स्थिर रखने से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों के मिले-जुले रुख ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 10:19 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 400.28 अंक यानी 0.54 प्रतिशत चढ़कर 73,646.31 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 110.41 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,809.25 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

बाजार में तेजी के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला प्रमुख वजहों में शामिल रहा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक सतर्क भी नजर आए।

आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

गुरुवार को बाजार के अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), मीडिया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निजी वित्तीय सेवा क्षेत्र ने भी बाजार को मजबूती देने में योगदान दिया।

इसके अलावा एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और धातु क्षेत्र के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। फार्मा, स्वास्थ्य सेवा और तेल एवं गैस सूचकांकों में मामूली तेजी दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में भी हल्की बढ़त देखने को मिली।

हालांकि, सभी क्षेत्रों में तेजी नहीं रही। रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और रसायन क्षेत्र के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सीमेंट और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे।

टीसीएस के शेयर चढ़े, बजाज फिनसर्व में गिरावट

प्रमुख कंपनियों के शेयरों की बात करें तो टीसीएस के शेयरों में करीब एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर, बजाज फिनसर्व के शेयर लगभग एक प्रतिशत गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

निवेशक अलग-अलग क्षेत्रों में कंपनियों के प्रदर्शन और वैश्विक आर्थिक संकेतों को ध्यान में रखते हुए खरीद-बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में बाजार में क्षेत्रवार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अमेरिकी फेड के फैसले से बाजार को मिला समर्थन

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को लगभग 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रखा। इस फैसले से वैश्विक शेयर बाजारों को कुछ समर्थन मिला। ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने से निवेशकों ने राहत की सांस ली, हालांकि महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों की अहम भूमिका रहेगी।

रुपये में 11 पैसे की मजबूती

अमेरिकी डॉलर में नरमी के बीच गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई। रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे चढ़कर 95.17 के स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि, रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमतों का असर बना हुआ है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

विदेशी और घरेलू निवेशकों ने की खरीदारी

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 871.83 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसी दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 643.35 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, निवेशकों की आगे की रणनीति वैश्विक संकेतों और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 1.03 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 114.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इसके बावजूद कीमतों का ऊंचा स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत का व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव पड़ने के साथ आयातित महंगाई भी बढ़ने की आशंका है।

इसके अलावा, इस साल मानसून की स्थिति कमजोर रहने से महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता भी जताई गई है।

वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख

गुरुवार को एशियाई बाजारों में कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। जापान के निक्केई 225 वायदा में 0.4 प्रतिशत और टॉपिक्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शंघाई कंपोजिट में 0.6 प्रतिशत और एसएंडपी 500 वायदा में 0.5 प्रतिशत की कमजोरी रही।

इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 में 0.4 प्रतिशत और हांगकांग के हैंग सेंग में 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा में 0.1 प्रतिशत की गिरावट रही।

इससे पहले बुधवार को भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। बीएसई सेंसेक्स 352.64 अंक टूटकर 73,246.03 पर और एनएसई निफ्टी 50.90 अंक गिरकर 22,698.85 पर बंद हुआ था।

निवेशकों के लिए आगे क्या अहम रहेगा?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेड की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। बाजार में मौजूदा तेजी के बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश संबंधी निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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