संसद में साधु वेश पर सियासी संग्राम, संत समाज ने लोकसभा स्पीकर से उठाई कार्रवाई की मांग

संसद भवन के मकर द्वार पर राम मंदिर के कथित चढ़ावा मामले को लेकर विपक्ष के सांकेतिक प्रदर्शन पर नया विवाद खड़ा हो गया है। संत समाज और भाजपा ने प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताते हुए इसे साधु-संतों, भगवा वस्त्र और सनातन परंपरा का अपमान बताया है। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर हाथ में दानपेटी लिए प्रतीकात्मक रूप से चढ़ावा एकत्र करते नजर आए। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने दानपेटी में सांकेतिक रूप से चढ़ावा डाला। इसके बाद प्रदर्शन के हिस्से के रूप में पप्पू यादव ने दानपेटी लेकर भागने का अभिनय किया, जबकि अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और पकड़ने का सांकेतिक प्रदर्शन किया।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन साधु-संतों की वेशभूषा का इस्तेमाल कर ऐसा संदेश देना अनुचित है, जिससे पूरे संत समाज की छवि प्रभावित हो। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने और सार्वजनिक माफी की मांग की।
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदर्शन के माध्यम से संत समाज, भगवा और सनातन परंपरा का अपमान किया गया है। उन्होंने भी लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले में कार्रवाई की मांग की।
वहीं, विपक्ष का कहना है कि यह प्रदर्शन राम मंदिर के कथित चढ़ावा मामले को लेकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।





