मांगें नहीं मानी तो आंदोलन की चेतावनी, धरने पर बैठा मीणा समाज

अलवर शहर के भूगोर तिराहे पर कप्तान छुट्टन लाल की मूर्ति स्थापित करने और तिराहे का नाम उनके नाम पर रखने की मांग को लेकर मीणा समाज ने सचिवालय गेट के पास टेंट लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि वे पिछले 8 वर्षों से लगातार यह मांग उठाते आ रहे हैं। समाज का कहना है कि वर्ष 2018 से यह प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष रखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि 2026 आ जाने के बावजूद मांग लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कप्तान छुट्टन लाल समाज के महान पुरुष थे
धरने पर बैठे नरेंद्र मीणा ने कहा कि कप्तान छुट्टन लाल मीणा समाज के महान पुरुष रहे हैं। शहर में अन्य महापुरुषों की मूर्तियां चौराहों पर स्थापित हैं और सड़कों का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया है, ऐसे में उनकी मांग पूरी तरह जायज है।
एनएचएआई की एनओसी न मिलने से अटका मामला
नरेंद्र मीणा ने बताया कि पहले इस मांग को लेकर प्रशासन स्तर पर सहमति भी बन चुकी थी, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा एनओसी नहीं दिए जाने के कारण मामला अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि भूगोर तिराहे पर सड़क चौड़ीकरण प्रस्तावित होने के कारण मूर्ति स्थापना में अड़चन आ रही है।
मीणा समाज की मांग है कि यदि भूगोर तिराहे पर मूर्ति लगाना संभव नहीं है, तो पीडब्ल्यूडी की किसी अन्य भूमि का आवंटन किया जाए और तिराहे का नाम बदलकर “कप्तान छुट्टन लाल तिराहा” किया जाए।
धरना दे रहे लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभी केवल शुरुआत है, जरूरत पड़ने पर सर्व समाज को साथ जोड़कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।





